भारत छोड़ो आंदोलन के इन 6 अमर शहीदों को किया गया याद, बनगांव में उठी शहीद स्मारक बनाने की मांग

सहरसा के बनगांव में भारत छोड़ो आंदोलन के 6 अमर शहीदों को विशेष श्रद्धांजलि दी गई. इस अवसर पर स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को याद किया गया और बनगांव चौक पर स्मारक बनाने की मांग उठी. यह आयोजन स्थानीय विरासत को संजोने का एक महत्वपूर्ण प्रयास रहा.

Quit India Movement Martyrs Saharsa: कहरा (सहरसा). आजादी की लड़ाई की कहानियां अक्सर इतिहास की किताबों तक सिमट जाती हैं, लेकिन कुछ नाम ऐसे होते हैं जिन्हें स्थानीय लोग पीढ़ियों तक याद रखते हैं. सहरसा के बनगांव में शनिवार को ऐसे ही छह अमर शहीदों को याद किया गया, जिन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी.

बनगांव भगवती स्थान परिसर में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में हरिकांत झा विद्यार्थी, पुलकित कामत, भोला ठाकुर, कालेश्वर मंडल, केदारनाथ तिवारी और धीरो राय को श्रद्धापूर्वक नमन किया गया. कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने स्वतंत्रता आंदोलन में उनके योगदान और बलिदान को याद करते हुए उनके आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प लिया.

दीप जलाकर कार्यक्रम की हुई शुरुआत

श्रद्धांजलि कार्यक्रम का शुभारंभ अध्यक्ष सह पूर्व प्रधानाचार्य विश्वनाथ खां ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया. इसके बाद वक्ताओं ने सहरसा और आसपास के इलाके में स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान हुए संघर्ष और स्थानीय सेनानियों की भूमिका पर चर्चा की.

विश्वनाथ खां ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में सहरसा के स्वतंत्रता आंदोलन के सेनानियों के संघर्ष और उनके कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि आजादी की लड़ाई में स्थानीय लोगों का योगदान भी महत्वपूर्ण रहा है, जिसे नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है.

बनगांव चौक पर बने शहीद स्मारक

कार्यक्रम के दौरान अमर शहीदों की स्मृति को स्थायी रूप देने की मांग भी उठी. विश्वनाथ खां ने जनप्रतिनिधियों और युवाओं से बनगांव चौक पर शहीद स्मारक बनवाने की पहल करने की अपील की.

उनका कहना था कि स्मारक सिर्फ एक संरचना नहीं होगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपने क्षेत्र के स्वतंत्रता सेनानियों और उनके बलिदान की याद दिलाने का माध्यम बनेगा.

स्वतंत्रता संग्राम की घटनाएं साझा कीं

प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी पंडित छेदी झा द्विजवर के पौत्र और बनगांव के पूर्व मुखिया धनंजय कुमार झा ने भी स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी कई घटनाओं का उल्लेख किया.

उन्होंने युवाओं से स्वतंत्रता सेनानियों के आदर्शों से प्रेरणा लेने और अपनी ऊर्जा को देशहित में लगाने का आह्वान किया. कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि आजादी सिर्फ इतिहास की उपलब्धि नहीं, बल्कि संघर्ष, त्याग और बलिदान की लंबी कहानी है.

खुले आसमान के नीचे जले दीप

कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण तब आया, जब खुले आसमान के नीचे अमर शहीदों की स्मृति में दीप जलाये गये. उपस्थित लोगों ने दीप जलाकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी और देशभक्ति के नारे लगाकर उनके प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की.

कार्यक्रम में स्थानीय लोगों और युवाओं की भागीदारी भी रही. इससे आयोजन सिर्फ श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं रहा, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन की स्थानीय विरासत को याद करने का अवसर भी बना.

Quit India Movement Martyrs Saharsa: अगले साल और भव्य आयोजन की तैयारी

कार्यक्रम को सफल बनाने में दुर्गा नवयुवक संघ के सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा. समाजसेवी विवेकानंद मिश्र, विदुशेखर खां, बीरबल झा, बच्चा कांत मिश्र, देवकांत मिश्र, शिव शंकर झा, चंदन कुमार मिश्र, माखन झा सहित अन्य वक्ताओं ने शहीदों को नमन किया.

वक्ताओं ने अगले वर्ष से इस कार्यक्रम को और भव्य रूप से आयोजित करने का आह्वान किया, ताकि अधिक से अधिक युवा और स्थानीय लोग स्वतंत्रता आंदोलन के इन गुमनाम या कम चर्चित नायकों के बारे में जान सकें.

पारस कुमार झा के संचालन में कार्यक्रम देर रात तक चला. अंत में बनगांव नगर उपाध्यक्ष रुपेश कुमार कामत ने धन्यवाद ज्ञापित किया.

बनगांव में उठी शहीद स्मारक की मांग अब स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण सवाल है. यदि इस दिशा में पहल होती है तो क्षेत्र के छह अमर शहीदों की स्मृति को स्थायी पहचान मिल सकती है और आने वाली पीढ़ियों को अपने इलाके के स्वतंत्रता संघर्ष से जोड़ने का एक मजबूत माध्यम तैयार हो सकता है.

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लेखक के बारे में

By दीपांकर श्रीवास्तव

दीपांकर श्रीवास्तव प्रिंट माध्यम में 20 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत दैनिक जागरण से की. अभी प्रभात खबर के सहरसा कार्यालय में काम कर रहे हैं. शिक्षा, अनुसंधान, कला-संस्कृति व सिनेमा में रुचि रखते हैं.

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