TB Free India Campaign: सहरसा जिले में टीबी मुक्त भारत अभियान अब मिशन मोड में चल रहा है. स्वास्थ्य विभाग, जीविका और समाज कल्याण विभाग के संयुक्त प्रयास से चलाए जा रहे विशेष स्क्रीनिंग अभियान में महज एक सप्ताह के भीतर 1 लाख 62 हजार 691 लोगों की टीबी जांच की गई. इस दौरान 99 नए टीबी मरीजों की पहचान कर उनका इलाज शुरू कराया गया. वहीं जन भागीदारी अभियान के तहत 12 मरीजों को निक्षय मित्रों ने गोद लेकर निक्षय पोषण किट भी उपलब्ध कराई.
114 हाई रिस्क गांवों में 97 टीमों की तैनाती
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिले में टीबी के अधिक जोखिम वाले 114 गांवों की पहचान की गई है. इन गांवों में विशेष स्क्रीनिंग के लिए 97 टीमों का गठन किया गया है. प्रत्येक टीम में कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर, आशा फैसिलिटेटर और जीविका कर्मियों को शामिल किया गया है. ये टीमें घर-घर जाकर संभावित मरीजों की पहचान कर रही हैं. साथ ही लोगों को टीबी के लक्षण, समय पर जांच, नियमित दवा और बचाव के उपायों के बारे में जागरूक भी कर रही हैं.
एक सप्ताह में 99 मरीजों की पहचान, हजारों की हुई जांच
स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि तीन जुलाई तक जिले में 57 हजार 103 लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी थी. इसके बाद तीन से 10 जुलाई तक चले विशेष अभियान में 1 लाख 62 हजार 691 लोगों की स्क्रीनिंग की गई. इनमें से 1 लाख 54 हजार 142 लोगों का निक्षय पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण किया गया. वहीं 4 हजार 153 लोगों की स्वास्थ्य संस्थानों में विस्तृत जांच कराई गई. अभियान के दौरान कुल 99 टीबी मरीजों की पहचान कर उन्हें उपचार से जोड़ दिया गया.
TB Free India Campaign: 12 मरीजों को मिला निक्षय पोषण किट
सदर मॉडल अस्पताल के एमसीएच भवन में राष्ट्रीय यक्ष्मा उन्मूलन कार्यक्रम के तहत आयोजित जन भागीदारी अभियान का उद्घाटन उप विकास आयुक्त गौरव कुमार ने किया. इस अवसर पर विभिन्न सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने 12 टीबी मरीजों को गोद लेकर निक्षय पोषण किट उपलब्ध कराई. मरीजों को नियमित दवा लेने, पौष्टिक भोजन करने और बीच में इलाज नहीं छोड़ने की सलाह भी दी गई.
समाज की भागीदारी से मिलेगा टीबी मुक्त सहरसा का लक्ष्य
उप विकास आयुक्त गौरव कुमार ने कहा कि टीबी उन्मूलन केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है. उन्होंने लोगों से निक्षय मित्र बनकर टीबी मरीजों की पोषण संबंधी जरूरतों में सहयोग करने की अपील की. उनका कहना था कि जनभागीदारी से ही टीबी मुक्त सहरसा का लक्ष्य समय पर हासिल किया जा सकेगा.
समय पर जांच और इलाज से बच सकती है जान
सिविल सर्जन डॉ. राजनारायण प्रसाद ने बताया कि टीबी एक संक्रामक श्वसन रोग है, जो संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या सांस के माध्यम से फैलता है. उन्होंने कहा कि समय पर जांच, नियमित दवा और उपचार पूरा करने से इस बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है. स्वास्थ्य विभाग आने वाले दिनों में भी विशेष स्क्रीनिंग, मरीजों की खोज, निक्षय पोषण सहायता और जनजागरूकता अभियान को और तेज करेगा.
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