Sonbarsa Raj Water Plant: लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग यानी पीएचईडी की ओर से नगर क्षेत्र में संचालित 29 मिनी वाटर प्लांटों का हस्तांतरण नगर प्रशासन को कर दिया गया है. लेकिन हस्तांतरण की प्रक्रिया के बाद भी प्लांटों के रखरखाव और संचालन की व्यवस्था पूरी तरह सुचारु नहीं हो सकी है. इसका असर अब जलापूर्ति के साथ-साथ सड़कों पर भी दिखाई देने लगा है.
कई स्थानों पर पाइप लिकेज के कारण बिना बारिश के ही सड़क पर पानी जमा हो रहा है. लगातार जलजमाव से सड़कें क्षतिग्रस्त हो रही हैं और कई जगह बड़े-बड़े गड्ढे बन गये हैं. दूसरी ओर, कुछ वाटर प्लांटों के स्मार्ट मीटर का रिचार्ज कई महीनों से नहीं होने के कारण सैकड़ों परिवारों की जलापूर्ति प्रभावित होने की बात सामने आयी है.
कॉलेज गेट के पास सड़क पर लगातार जमा हो रहा पानी
कॉलेज गेट के समीप सोनवर्षा-बैजनाथपुर स्टेट हाइवे पर दो स्थानों पर पाइप लिकेज की समस्या बनी हुई है. यहां लगातार पानी जमा रहने से सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे बन गये हैं. ग्रामीणों का कहना है कि पाइप से लगातार पानी निकलने के कारण सड़क पर जलजमाव बना रहता है.
लगातार पानी जमा रहने से सड़क की मरम्मत भी प्रभावित हो रही है. स्थानीय लोगों के लिए यह समस्या आवागमन के साथ सड़क की स्थिति को लेकर भी परेशानी का कारण बन रही है.
इसी तरह सोहा वार्ड संख्या एक में बेचन सिंह के घर के आगे, सोनवर्षा खादी भंडार के सामने समेत दर्जनों अन्य स्थानों पर पाइप लिकेज के कारण जलजमाव की समस्या बनी हुई है.
स्मार्ट मीटर रिचार्ज खत्म, सैकड़ों परिवारों पर असर
हरीखंड और मनौरी गांव में स्थापित वाटर प्लांट के ऑपरेटर मो. उस्मान और बैजनाथ सिंह उर्फ बैजू ने बताया कि उनके प्लांट के स्मार्ट मीटर का रिचार्ज कई महीनों से समाप्त है. इसके कारण इन प्लांटों से जुड़े सैकड़ों परिवारों की जलापूर्ति प्रभावित है.
ऑपरेटरों के अनुसार, स्मार्ट मीटर रिचार्ज को लेकर संवेदक से संपर्क करने पर उन्हें बताया गया कि सभी प्लांट नगर प्रशासन के अधीन चले गये हैं. ऐसे में अब इस समस्या के समाधान के लिए नगर प्रशासन से संपर्क करने की बात कही जा रही है.
कई प्लांट ऑपरेटरों का कहना है कि यदि व्यवस्था में जल्द सुधार नहीं हुआ तो आने वाले एक-दो महीनों में अधिकांश प्लांटों से जलापूर्ति प्रभावित होने की स्थिति बन सकती है. स्मार्ट मीटर रिचार्ज के अलावा ऑपरेटरों के मानदेय भुगतान और प्लांटों की मरम्मत जैसे काम भी अब नगर प्रशासन की जिम्मेदारी में आने हैं.
मार्च में होना था हस्तांतरण, जुलाई में जारी हुआ निर्देश
विभागीय सूत्रों के अनुसार, पीएचईडी को मार्च में ही नगर क्षेत्र के मिनी वाटर प्लांटों को संबंधित नगर निकाय के अधीन करना था. प्रक्रिया पूरी नहीं होने के बाद आठ जुलाई को पीएचईडी के अभियंता प्रमुख सह विशेष सचिव ने सभी कार्यपालक अभियंताओं को पत्र भेजा.
पत्र में दो दिनों के अंदर सभी प्लांटों को जिस स्थिति में हैं, उसी स्थिति में नगर निकायों को हस्तांतरित करने का निर्देश दिया गया था. इसके बाद हस्तांतरण की प्रक्रिया आगे बढ़ी.
अब नगर प्रशासन की ओर से प्लांटों का सर्वे किया जा रहा है. सर्वे में प्लांटों की मौजूदा स्थिति और संचालन से जुड़े विभिन्न बिंदुओं की जांच की जा रही है.
Sonbarsa Raj Water Plant: नगर प्रशासन बोला, जल्द दूर होगी लिकेज की समस्या
ईओ नवीन कुमार ने कहा कि फिलहाल मिनी वाटर प्लांटों का सर्वे कराया जा रहा है. इसमें कई बिंदुओं की जांच की जा रही है. हैंडओवर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्लांटों के संचालन की जिम्मेदारी नगर प्रशासन की होगी.
उन्होंने कहा कि पाइप लिकेज की समस्या की यथाशीघ्र मरम्मत करायी जाएगी. वहीं, पीएचईडी के कनीय अभियंता भोले शंकर ने बताया कि हैंडओवर की प्रक्रिया जल्द पूरी हो जाएगी. स्मार्ट मीटर के रिचार्ज से जुड़ी समस्या को भी जल्द दूर कराने की बात उन्होंने कही.
अब देखना यह है कि 29 मिनी वाटर प्लांटों के हस्तांतरण के बाद नगर प्रशासन संचालन, नियमित रखरखाव, स्मार्ट मीटर रिचार्ज और पाइप लिकेज जैसी समस्याओं को कितनी जल्दी दूर करता है. क्योंकि फिलहाल इसका सीधा असर लोगों की जलापूर्ति और सड़क की स्थिति पर पड़ रहा है.
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