Saharsa News:सहरसा में गांव की गलियों और सार्वजनिक जगहों को साफ रखने की जिम्मेदारी जिन सफाईकर्मियों के कंधों पर है, उन्हीं के घर का चूल्हा 17 महीने से बकाये मानदेय के इंतजार में मुश्किल से जल रहा है. सत्तरकटैया प्रखंड की बारा पंचायत में कार्यरत सफाईकर्मियों का आरोप है कि उन्हें लंबे समय से उनके काम का निर्धारित मानदेय नहीं मिला है.
लगातार भुगतान नहीं होने से आर्थिक परेशानी झेल रहे सफाईकर्मी गुरुवार को समाहरणालय पहुंचे और जिलाधिकारी को आवेदन देकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की. उन्होंने बकाया मानदेय का जल्द भुगतान कराने के साथ भुगतान में देरी के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है.
17 महीने से भुगतान लंबित, बढ़ता गया आर्थिक संकट
सफाईकर्मियों के अनुसार, वे पंचायत क्षेत्र में सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए लगातार काम कर रहे हैं. उनका कहना है कि जनवरी 2023 से वे अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं, लेकिन निर्धारित मानदेय का नियमित भुगतान नहीं हो रहा है.
सफाईकर्मियों को प्रति माह तीन हजार रुपये मानदेय निर्धारित होने की बात कही गयी है. 17 महीने का भुगतान लंबित होने के कारण उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है.
उनका कहना है कि घर का राशन, बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा की जरूरतों का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है.
सफाई का काम नियमित, लेकिन मेहनताना नहीं
सफाईकर्मियों का कहना है कि पंचायत की सफाई व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए वे नियमित रूप से अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं. गांव की गलियों और सार्वजनिक स्थानों की सफाई जैसे जरूरी काम के बावजूद उन्हें समय पर मेहनताना नहीं मिल रहा है.
उन्होंने कहा कि वे किसी अतिरिक्त सुविधा या विशेष लाभ की मांग नहीं कर रहे हैं. उनकी मांग सिर्फ इतनी है कि जिस काम के लिए उन्हें लगाया गया है, उसका निर्धारित मानदेय समय पर दिया जाये.
लंबे समय तक भुगतान नहीं होने से काम करने वाले कर्मचारियों में निराशा बढ़ रही है.
समाहरणालय पहुंचकर डीएम को दिया आवेदन
बकाया मानदेय के भुगतान की मांग को लेकर सफाईकर्मियों ने गुरुवार को जिला मुख्यालय का रुख किया. वे समाहरणालय पहुंचे और जिलाधिकारी को आवेदन देकर अपनी समस्या बतायी.
सफाईकर्मियों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है. साथ ही लंबे समय से लंबित मानदेय का शीघ्र भुगतान कराने का अनुरोध किया है.
उन्होंने यह भी मांग की है कि भुगतान में देरी के लिए जो लोग जिम्मेदार हैं, उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाये.
‘काम के बदले निर्धारित मेहनताना चाहिए’
सफाईकर्मियों ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि वे लगातार अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं. उनका कहना है कि मेहनत के बदले मिलने वाला मानदेय समय पर नहीं मिलने से आर्थिक स्थिति लगातार खराब होती जा रही है.
उनके लिए 17 महीने का बकाया केवल कागज पर दर्ज रकम नहीं है. यह उनके परिवार की रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ा पैसा है, जिसका लंबे समय से इंतजार किया जा रहा है.
ऐसे में अब उनकी उम्मीद जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है.
इन सफाईकर्मियों ने उठायी आवाज
मामले को लेकर टुनटुन कामत, परमेश्वर सादा, महादेव राम, किरण देवी, बबलू सादा, अजय दास, छठु मुखिया और प्रकाश कामत समेत अन्य सफाईकर्मियों ने जिला प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है.
सफाईकर्मियों को उम्मीद है कि जिलाधिकारी मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित स्तर पर जांच करायेंगे और बकाये मानदेय के भुगतान की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी.
Saharsa News: अब प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी नजर
पंचायत में सफाई व्यवस्था को सुचारु रखने वाले कर्मियों का मानदेय 17 महीने से लंबित होने का मामला सामने आने के बाद अब प्रशासनिक कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी.
सफाईकर्मियों ने बकाया भुगतान के साथ जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है. ऐसे में यह देखना होगा कि जिला प्रशासन मामले की जांच के बाद क्या कदम उठाता है और सफाईकर्मियों को उनका लंबित मानदेय कब तक मिल पाता है.
