Saharsa News: सहरसा के राजेंद्र मिश्र महाविद्यालय में रविवार को आयोजित सम्मान सह विदाई समारोह एक भावुक और यादगार पल में बदल गया. अंग्रेजी विभागाध्यक्ष डॉ आशुतोष कुमार झा और भौतिकी विभागाध्यक्ष डॉ उर्मिला अरोड़ा को 42 वर्षों की गौरवपूर्ण शैक्षणिक सेवा के बाद महाविद्यालय परिवार ने सम्मानपूर्वक विदाई दी. समारोह में पाग, चादर, पुष्पगुच्छ और स्मृति-चिह्न भेंट कर दोनों शिक्षकों के लंबे योगदान को नमन किया गया.
चार दशक से अधिक समय तक हजारों विद्यार्थियों को शिक्षा देने वाले इन दोनों प्राध्यापकों की विदाई केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं रही, बल्कि महाविद्यालय के इतिहास, स्मृतियों और गुरु-शिष्य परंपरा का भावनात्मक उत्सव बन गई. कार्यक्रम में शिक्षक, शिक्षकेत्तर कर्मचारी और कई गणमान्य लोगों की उपस्थिति ने इस अवसर को और अधिक गरिमामय बना दिया.
जब विदाई समारोह में छलक उठीं भावनाएं
समारोह के दौरान सबसे भावुक क्षण तब आया, जब डॉ आशुतोष कुमार झा ने अंतिम बार महाविद्यालय की उपस्थिति पंजी पर हस्ताक्षर किए और उसे अपने सीने से लगा लिया. इस दृश्य ने उपस्थित शिक्षकों और कर्मचारियों को भावुक कर दिया. लंबे सेवाकाल के बाद संस्थान से विदा लेना केवल नौकरी का अंत नहीं, बल्कि जीवन के एक महत्वपूर्ण अध्याय का समापन था.
डॉ कविता कुमारी ने अपने संबोधन में इस क्षण को पूरे समारोह का सबसे मार्मिक पल बताया और कहा कि यह दृश्य महाविद्यालय परिवार लंबे समय तक नहीं भूल पाएगा.
प्राचार्य बोले, शिक्षक कभी सेवानिवृत्त नहीं होते
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो डॉ गुलरेज रौशन रहमान ने कहा कि शिक्षक कभी वास्तव में सेवानिवृत्त नहीं होते. औपचारिक सेवा समाप्त होने के बाद भी वे शिक्षा, शोध और समाज निर्माण में अपनी भूमिका निभाते रहते हैं. उन्होंने कहा कि डॉ आशुतोष झा और डॉ उर्मिला अरोड़ा ने अपने ज्ञान, अनुशासन, कार्यनिष्ठा और सौहार्दपूर्ण व्यक्तित्व से महाविद्यालय की शैक्षणिक संस्कृति को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया.
उनके अनुसार, ऐसे शिक्षक किसी भी संस्थान की सबसे बड़ी पूंजी होते हैं और उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करता है.
स्थापना काल से जुड़े रहे दोनों प्राध्यापक
डॉ इन्द्रकांत झा ने कहा कि दोनों प्राध्यापक महाविद्यालय की स्थापना से लेकर आज तक संस्थान के विकास के साक्षी रहे. उन्होंने पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया और उनका सेवाकाल पूरी तरह निष्कलंक रहा.
उन्होंने कहा कि संस्थान की पहचान केवल भवनों से नहीं, बल्कि ऐसे समर्पित शिक्षकों से बनती है, जिन्होंने दशकों तक विद्यार्थियों और शिक्षा व्यवस्था को अपना समय और ऊर्जा दी.
डॉ आशुतोष झा ने कहा, यह महाविद्यालय मेरा परिवार है
अपने संबोधन में डॉ आशुतोष कुमार झा ने कहा कि राजेंद्र मिश्र महाविद्यालय उनके लिए केवल कार्यस्थल नहीं, बल्कि एक परिवार रहा है. विद्यार्थियों और सहकर्मियों से मिला स्नेह उनके जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है.
उन्होंने विश्वास जताया कि सेवानिवृत्ति के बाद भी उनका रिश्ता महाविद्यालय और विद्यार्थियों से बना रहेगा और वे शिक्षा तथा अकादमिक गतिविधियों से जुड़े रहेंगे.
डॉ उर्मिला अरोड़ा बोलीं, 42 वर्ष जीवन की सबसे सुंदर स्मृतियां
डॉ उर्मिला अरोड़ा ने कहा कि महाविद्यालय में बिताए 42 वर्ष उनके जीवन की सबसे सुंदर स्मृतियों में शामिल रहेंगे. उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अच्छे संस्कार और सफलता की राह दिखाना ही उनके जीवन का सबसे बड़ा उद्देश्य रहा और इस दायित्व को निभाने का उन्हें आत्मसंतोष है.
उनकी बातों ने उपस्थित विद्यार्थियों और सहकर्मियों को गहराई से प्रभावित किया.
Saharsa News: शिक्षकों ने साझा कीं यादें और शुभकामनाएं
समारोह में डॉ अशोक कुमार झा, सुशील कुमार झा, डॉ पूजा कुमारी, डॉ शुभ्रा पाण्डेय, डॉ नवीउल इस्लाम, डॉ सुमन्त राव, डॉ लक्ष्मी कुमार कर्ण, डॉ संजय कुमार, डॉ रमानंद रमण, डॉ प्रतीभा कपाही, डॉ पंकज यादव, डॉ संजीव कुमार, डॉ कृष्ण कुमार और सोनी कुमारी सहित कई शिक्षकों ने दोनों सेवानिवृत्त प्राध्यापकों के व्यक्तित्व, शैक्षणिक योगदान और मानवीय मूल्यों को याद करते हुए उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं.
कार्यक्रम का संचालन डॉ अक्षय कुमार चौधरी ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ आलोक कुमार झा ने प्रस्तुत किया.
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