नवहट्टा (सहरसा) से राजेश डेनजील
Saharsa News: नवहट्टा प्रखंड मुख्यालय में डिग्री कॉलेज संचालित करने की मांग को लेकर रविवार को आंदोलन ने नया मोड़ ले लिया. दुर्गास्थान परिसर में आयोजित बैठक के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने बाजार क्षेत्र में मशाल जुलूस निकालकर अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की. आंदोलनकारियों ने सोमवार से प्रशासनिक अनुमति के साथ धरना-प्रदर्शन शुरू करने की घोषणा की है.
स्थानीय समाजसेवी प्रमोद कुमार सिंह की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में छात्र-छात्राओं, युवाओं, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया. सभी ने एक स्वर में कहा कि नवहट्टा मुख्यालय डिग्री कॉलेज संचालन के लिए आवश्यक सुविधाओं और मानकों को पूरा करता है, इसलिए कॉलेज का संचालन यहीं से होना चाहिए.
काशिमपुर में कॉलेज चिन्हित होने से बढ़ा असंतोष
राज्य सरकार की हर प्रखंड डिग्री कॉलेज योजना के तहत नवहट्टा को भी कॉलेज की सौगात मिली है. हालांकि प्रखंड मुख्यालय से लगभग सात किलोमीटर दूर काशिमपुर स्थित उत्क्रमित उच्च विद्यालय को कॉलेज संचालन के लिए चिन्हित किए जाने के बाद क्षेत्र में विरोध शुरू हो गया.
छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि दूरस्थ स्थान पर कॉलेज संचालित होने से बड़ी संख्या में विद्यार्थियों, विशेषकर छात्राओं को परेशानी का सामना करना पड़ेगा. यही वजह है कि स्थानीय लोग लगातार मुख्यालय में ही कॉलेज स्थापित करने की मांग कर रहे हैं.
संघर्ष समिति का गठन, आंदोलन को मिला संगठनात्मक रूप
बैठक के दौरान डिग्री कॉलेज बचाओ संघर्ष समिति का गठन किया गया. समिति ने नवहट्टा मुख्यालय में स्थायी और अस्थायी दोनों स्तर पर डिग्री कॉलेज संचालन की मांग उठाई. आंदोलनकारियों का कहना है कि यह किसी राजनीतिक दल का कार्यक्रम नहीं, बल्कि शिक्षा और युवाओं के भविष्य से जुड़ा जनआंदोलन है.
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने की कोशिश की, लेकिन स्थानीय जनता शिक्षा के मुद्दे पर एकजुट है और आंदोलन को गैर-राजनीतिक स्वरूप में आगे बढ़ाना चाहती है.
मांग नहीं मानी गई तो और तेज होगा आंदोलन
मशाल जुलूस में शामिल लोगों ने प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा. आंदोलनकारी चरणबद्ध तरीके से लोकतांत्रिक तरीके से अपनी लड़ाई जारी रखने की बात कह रहे हैं.
रविवार को शुरू हुए इस अभियान में बड़ी संख्या में छात्र, युवा, अभिभावक, समाजसेवी और बुजुर्ग शामिल हुए. अब सबकी नजर सोमवार से शुरू होने वाले धरना-प्रदर्शन और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है.
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