राजकीय पॉलिटेक्निक सहरसा ने रचा इतिहास, तीन डिप्लोमा कोर्स को मिली NBA मान्यता

सहरसा से विनय कुमार मिश्र की रिपोर्ट Saharsa News: राजकीय पॉलिटेक्निक सहरसा ने तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है. संस्थान के डिप्लोमा इन मैकेनिकल इंजीनियरिंग, डिप्लोमा इन इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग और डिप्लोमा इन इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों को नेशनल बोर्ड ऑफ एक्रिडिटेशन (NBA) से मान्यता प्राप्त हुई है. इस उपलब्धि के साथ राजकीय […]

सहरसा से विनय कुमार मिश्र की रिपोर्ट

Saharsa News: राजकीय पॉलिटेक्निक सहरसा ने तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है. संस्थान के डिप्लोमा इन मैकेनिकल इंजीनियरिंग, डिप्लोमा इन इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग और डिप्लोमा इन इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों को नेशनल बोर्ड ऑफ एक्रिडिटेशन (NBA) से मान्यता प्राप्त हुई है. इस उपलब्धि के साथ राजकीय पॉलिटेक्निक सहरसा बिहार का दूसरा ऐसा राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थान बन गया है, जिसे एक साथ तीन डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के लिए एनबीए मान्यता मिली है.

एनबीए से बढ़ी संस्थान की प्रतिष्ठा

एनबीए ने तीनों पाठ्यक्रमों को 1 जनवरी 2026 से 31 दिसंबर 2028 तक के लिए मान्यता प्रदान की है. यह उपलब्धि संस्थान की गुणवत्तापूर्ण तकनीकी शिक्षा, उत्कृष्ट शैक्षणिक वातावरण और सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है. शिक्षा जगत में इसे बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है.

संस्थान के प्राचार्य प्रो. मिथुन कुमार ने कहा कि यह उपलब्धि राजकीय पॉलिटेक्निक सहरसा के लिए ऐतिहासिक मील का पत्थर है. एनबीए मान्यता मिलने से छात्र-छात्राओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर पहचान मिलेगी. साथ ही उच्च शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में नए अवसर भी खुलेंगे.

उन्होंने कहा कि संस्थान भविष्य में भी गुणवत्ता और उत्कृष्टता के उच्च मानकों को बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास करता रहेगा.

क्वालिटी एजुकेशन की दिशा में लगातार काम का मिला परिणाम

आईक्यूएसी समन्वयक प्रो. शुभम ने कहा कि एनबीए मान्यता संस्थान की गुणवत्ता आधारित कार्यसंस्कृति और सतत सुधार प्रक्रिया का प्रत्यक्ष प्रमाण है. उन्होंने बताया कि परिणाम आधारित शिक्षा, प्रयोगशाला संसाधनों के उन्नयन, शिक्षण व्यवस्था को मजबूत बनाने और छात्रों के समग्र विकास के लिए लगातार काम किया गया.

वहीं एनबीए समन्वयक प्रो. सिद्धांत मल्लिक ने कहा कि यह सफलता संस्थान के सभी शिक्षकों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों और पूर्व छात्रों के सामूहिक प्रयास का परिणाम है. एनबीए के कठोर मानकों को पूरा करने के लिए लंबे समय से निरंतर कार्य किया जा रहा था.

टीम वर्क ने दिलाई बड़ी सफलता

संस्थान की इस उपलब्धि में मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभागों के विभागाध्यक्षों, शिक्षकों और कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही. साथ ही विज्ञान एवं मानविकी विभाग तथा अन्य सभी संकाय सदस्यों ने दस्तावेजीकरण, शैक्षणिक गुणवत्ता सुधार और संस्थागत विकास में सक्रिय योगदान दिया.

संस्थान परिवार ने इस सफलता को सामूहिक परिश्रम, समर्पण और टीम भावना का परिणाम बताते हुए सभी शिक्षकों, कर्मचारियों और हितधारकों के प्रति आभार व्यक्त किया है.

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लेखक के बारे में

Published by: Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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