सूचना आयोग का आदेश नहीं मानना नगर आयुक्त को पड़ा भारी, 25 हजार का अर्थदंड

सहरसा नगर निगम के नगर आयुक्त को सूचना का अधिकार (RTI) के तहत समय पर पूरी जानकारी न देने पर बिहार सूचना आयोग ने 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है. यह फैसला आयोग के आदेशों की अवहेलना के चलते लिया गया है.

Saharsa Municipal Commissioner RTI Fine: सहरसा सूचना का अधिकार यानी आरटीआई के तहत मांगी गयी जानकारी समय पर और पूरी उपलब्ध नहीं कराना सहरसा नगर निगम के लोक सूचना पदाधिकारी सह नगर आयुक्त को भारी पड़ा है. बिहार सूचना आयोग ने एक अपील मामले में नगर आयुक्त पर 25 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है. आयोग ने यह कार्रवाई अपीलार्थी को पूर्ण सूचना उपलब्ध नहीं कराने और बार-बार निर्देश के बावजूद सुनवाई में उपस्थित नहीं होने के मामले में की है.

आयोग ने अर्थदंड की राशि नगर आयुक्त के वेतन से वसूलने का निर्देश दिया है. इसके साथ ही मामला अभी खत्म नहीं हुआ है. आयोग ने आरटीआई अधिनियम की धारा 20(2) के तहत नगर आयुक्त को अंतिम अवसर देते हुए यह भी बताने को कहा है कि उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा सक्षम प्राधिकार से क्यों नहीं की जाए.

पहले पूरी सूचना देने का दिया गया था निर्देश

मामला वाद संख्या ए 8222/2024, चंदन सिंह बनाम प्रथम अपीलीय प्राधिकार सह नगर आयुक्त, नगर निगम सहरसा लोक सूचना पदाधिकारी, नगर निगम सहरसा से संबंधित है.

राज्य सूचना आयुक्त प्रकाश कुमार की ओर से पारित आदेश के अनुसार, 13 जनवरी 2026 को हुई सुनवाई में लोक सूचना पदाधिकारी सह नगर आयुक्त को अपीलार्थी को मांगी गयी सूचना उपलब्ध कराने और अगली सुनवाई में आयोग के समक्ष स्वयं उपस्थित होने का निर्देश दिया गया था.

इसके बाद नगर निगम की ओर से 27 फरवरी 2026 को अपीलार्थी को सूचना उपलब्ध करायी गयी. हालांकि, अपीलार्थी ने इसे आधी-अधूरी सूचना बताते हुए आपत्ति जतायी. इसी दौरान संबंधित अधिकारी सुनवाई में उपस्थित नहीं हुए.

आपत्ति के बाद भी नहीं हुआ पूरा अनुपालन

अपीलार्थी ने 26 अप्रैल को ईमेल के माध्यम से अपनी आपत्ति आयोग को भेजी. आयोग ने इस आपत्ति को नगर आयुक्त को भेजते हुए निर्देश दिया कि आपत्ति के आलोक में वांछित सूचना उपलब्ध करायी जाए और अगली सुनवाई में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहा जाए.

आयोग के आदेश के अनुसार, इसके बावजूद अगली सुनवाई में नगर आयुक्त उपस्थित नहीं हुए. साथ ही अपीलार्थी की आपत्ति के आधार पर मांगी गयी सूचना उपलब्ध कराने की बात भी सामने नहीं आयी.

इसके बाद आयोग ने दोबारा आपत्ति पत्र नगर आयुक्त को भेजकर आवश्यक अनुपालन करने का निर्देश दिया. आयोग के अनुसार, इसके बाद भी अनुपालन प्रतिवेदन प्राप्त नहीं हुआ और नगर आयुक्त सुनवाई में उपस्थित नहीं हुए.

आयोग ने माना आदेश की गंभीरता से नहीं हुई पालना

लगातार अनुपालन नहीं होने और सुनवाई में अनुपस्थिति को लेकर आयोग ने अपने आदेश में कड़ी टिप्पणी की. आदेश के अनुसार, लोक सूचना पदाधिकारी सह नगर आयुक्त को बार-बार सुनवाई के लिए बुलाया गया, लेकिन वे उपस्थित नहीं हुए.

आयोग ने कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि संबंधित अधिकारी आयोग के आदेश को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं और आदेश की अवहेलना कर रहे हैं.

इसी आधार पर आयोग ने नगर आयुक्त को अपीलार्थी को पूर्ण सूचना उपलब्ध नहीं कराने और आयोग के आदेश का अनुपालन नहीं करने का दोषी माना. इसके बाद आरटीआई अधिनियम की संबंधित धारा के तहत 25 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया.

वेतन से वसूली की जिम्मेदारी इन अधिकारियों को

अर्थदंड की राशि की वसूली के लिए आयोग ने आदेश की प्रतिलिपि सहरसा जिलाधिकारी, कोषागार पदाधिकारी सहरसा और महालेखाकार बिहार, पटना को भेजने का निर्देश दिया है. यानी लगाए गये 25 हजार रुपये के अर्थदंड की वसूली नगर आयुक्त के वेतन से की जानी है.

यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब आरटीआई के माध्यम से सरकारी विभागों से सूचना हासिल करने वाले आवेदकों के लिए समय पर और पूर्ण सूचना उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण माना जाता है.

अनुशासनात्मक कार्रवाई पर भी देना होगा जवाब

मामले में आयोग ने आगे की कार्रवाई का रास्ता भी खुला रखा है. नगर आयुक्त को आरटीआई अधिनियम की धारा 20(2) के तहत अंतिम अवसर देते हुए स्पष्टीकरण मांगा गया है.

उन्हें यह स्पष्ट करना होगा कि उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा सक्षम प्राधिकार से क्यों नहीं की जाए. आयोग ने अगली सुनवाई से पहले अपीलार्थी को प्रपत्रक के आलोक में पूर्ण सूचना उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया है.

अगली सुनवाई में लोक सूचना पदाधिकारी सह नगर आयुक्त की उपस्थिति अनिवार्य रखी गयी है. मामले की अगली सुनवाई 4 नवंबर को पूर्वाह्न 11 बजे निर्धारित की गयी है. पक्षकार आयोग में स्वयं उपस्थित होकर या वर्चुअल माध्यम से सुनवाई में शामिल हो सकते हैं.

Saharsa Municipal Commissioner RTI Fine: आरटीआई के उद्देश्य पर आयोग का जोर

आयोग ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि आरटीआई अधिनियम को प्रभावी बनाने के लिए जारी दिशा-निर्देशों के तहत मांगी गयी सूचना समय पर उपलब्ध कराना लोक सूचना पदाधिकारी का दायित्व है. अधिनियम के उद्देश्यों की पूर्ति में लोक सूचना पदाधिकारी को पूर्ण सहयोग करना चाहिए.

मालूम हो कि इससे पहले भी इसी तरह के एक अन्य मामले में बिहार सूचना आयोग ने नगर निगम आयुक्त पर 25 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया था. दो अलग-अलग मामलों में कुल 50 हजार रुपये का अर्थदंड लगाए जाने की जानकारी दी गयी है.

Also Read: JDU के ओरिएंटेशन कार्यक्रम में नहीं पहुंचे अनंत सिंह, एक मंच पर दिखे नीतीश-निशांत, चल रही है बैठक

Also Read: पटना सिविल कोर्ट को मिली बम से उड़ाने की धमकी, खाली कराया जा रहा परिसर, सर्च ऑपरेशन शुरू

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Vinay Kumar Mishra

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >