Saharsa News: सहरसा में वर्षों से महाविद्यालयों में शिक्षण कार्य कर रहे अतिथि सहायक प्राध्यापक अब अपनी सेवा को नियमित कराने की मांग को लेकर आंदोलन की राह पर हैं. बिहार राज्य अतिथि सहायक प्राध्यापक संघ के आह्वान पर 25 अगस्त को पटना में शांतिपूर्ण पैदल मार्च प्रस्तावित है. इसमें शामिल होने के लिए राजेंद्र मिश्र महाविद्यालय (आरएम कॉलेज) के अतिथि सहायक प्राध्यापकों ने सामूहिक अवकाश पर रहने का निर्णय लिया है.
इसी सिलसिले में शुक्रवार को आरएम कॉलेज में कार्यरत अतिथि सहायक प्राध्यापकों ने महाविद्यालय के प्रधानाचार्य से मुलाकात की और प्रस्तावित मार्च में शामिल होने की जानकारी दी.
25 अगस्त को जेपी गोलंबर से मुख्यमंत्री आवास तक मार्च
महाविद्यालय अतिथि सहायक प्राध्यापक संघ के प्रवक्ता डॉ सुमंत राव ने बताया कि अतिथि शिक्षक लगातार महाविद्यालयों में अपने शैक्षणिक दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं. इसके बावजूद उनकी सेवा को स्थायी स्वरूप नहीं मिल पाया है.
संघ के अनुसार, इसी मांग को लेकर 25 अगस्त को पटना के जेपी गोलंबर से मुख्यमंत्री आवास तक पैदल मार्च किया जायेगा. आरएम कॉलेज के अतिथि सहायक प्राध्यापक भी इसमें शामिल होंगे.
प्रस्तावित मार्च को शांतिपूर्ण बताते हुए संघ ने सरकार से अतिथि शिक्षकों की सेवा को 65 वर्ष की आयु तक स्थायी करने की मांग की है.
‘अब सेवा को नियमित करने का समय आ गया’
महाविद्यालय अतिथि सहायक प्राध्यापक संघ के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ अक्षय कुमार चौधरी ने कहा कि अतिथि सहायक प्राध्यापक लंबे समय से महाविद्यालयों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं.
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी जब विपक्ष में थे, तब उन्होंने विधानसभा के मुख्य द्वार पर बैनर के साथ अतिथि सहायक प्राध्यापकों के नियमितीकरण का समर्थन किया था.
डॉ चौधरी ने कहा कि अब जरूरत है कि सरकार कार्यरत अतिथि सहायक प्राध्यापकों की समस्याओं पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करे और उनकी सेवा को मूल वेतनमान पर नियमित करने की दिशा में कदम उठाये.
कॉलेजों में शिक्षण व्यवस्था का अहम हिस्सा हैं अतिथि शिक्षक
अतिथि सहायक प्राध्यापकों का कहना है कि वे महाविद्यालयों में नियमित रूप से शिक्षण कार्य करते आ रहे हैं. कक्षाएं लेने के साथ विद्यार्थियों की शैक्षणिक जरूरतों को पूरा करने में भी उनकी भूमिका रहती है.
ऐसे में लंबे समय तक सेवा देने के बावजूद नियमितीकरण नहीं होने का मुद्दा उनके लिए नौकरी की स्थिरता और भविष्य की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है.
संघ का कहना है कि उनकी मांग केवल सेवा संबंधी सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि लंबे समय से काम कर रहे शिक्षकों के भविष्य और सम्मानजनक सेवा शर्तों से भी जुड़ी है.
सामूहिक अवकाश से कॉलेजों में कामकाज पर पड़ सकता है असर
25 अगस्त को बड़ी संख्या में अतिथि सहायक प्राध्यापकों के सामूहिक अवकाश पर रहने से उस दिन कॉलेजों में शिक्षण व्यवस्था पर असर पड़ने की संभावना भी है.
हालांकि, संघ ने मार्च को शांतिपूर्ण रखने की बात कही है. शिक्षक सरकार तक अपनी मांग पहुंचाने के लिए लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन करेंगे.
अब नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार आंदोलन के बाद अतिथि सहायक प्राध्यापकों की नियमितीकरण की मांग पर क्या रुख अपनाती है.
Saharsa News: ये शिक्षक मार्च में होंगे शामिल
आरएम कॉलेज से प्रस्तावित मार्च में शामिल होने वाले अतिथि सहायक प्राध्यापकों में डॉ आलोक कुमार झा, डॉ किरण कुमारी, डॉ डेजी कुमारी, डॉ सुदीप कुमार झा, डॉ पिंकी कुमारी, डॉ बिल्लो राम, प्रियदर्शनी, डॉ मनोज कुमार, डॉ आलोक कुमार मिश्रा, डॉ पंकज कुमार यादव, डॉ निशित रंजन, डॉ अखिलेश कुमार मिश्रा, डॉ प्रशांत कुमार मनोज, डॉ नबीबुल इस्लाम, डॉ कृष्ण कुमार यादव, डॉ सुप्रिया कश्यप, डॉ प्रीति कुमारी, डॉ सुरेश प्रियदर्शी, डॉ रूद्राकिंकर वर्मा, डॉ कमलाकांत झा, डॉ हनी सिंह, डॉ धनंजय कुमार सिंह, डॉ संजय कुमार, डॉ प्रीति कुमारी, डॉ रूपक कुमारी, डॉ विकास कुमार, डॉ मनीष रंजन सैनी, डॉ सुरुचि चंद्रा, डॉ गौतम कुमार, डॉ लक्ष्मण कुमार, डॉ अब्दुल सत्तार, डॉ सोनी कुमारी, डॉ असरारुल हक, डॉ कोमल गुप्ता, डॉ बिट्टू कुमार मिश्रा, डॉ आनंद कुमार मिश्रा, डॉ रोशन कुमार यादव, डॉ अनिल कुमार और सौरभ कुमार पांडे शामिल हैं.
