Basudeva School Mid Day Meal: सहरसा. मध्य विद्यालय बासुदेवा में 12 सितंबर को मध्याह्न भोजन खाने के बाद दो दर्जन से अधिक बच्चों के बीमार पड़ने की घटना की जांच के लिए बिहार राज्य मिड डे मील वर्कर यूनियन और भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी (सीपीएम) की संयुक्त टीम शुक्रवार को विद्यालय पहुंची. टीम ने स्कूल में घटना से जुड़ी जानकारी ली और ग्रामीणों से मध्याह्न भोजन की मौजूदा व्यवस्था के बारे में भी जानकारी प्राप्त की.
जांच टीम में एमडीएम वर्कर यूनियन के राज्य महासचिव ब्यास प्रसाद यादव, सीपीएम जिला सचिव रणधीर यादव, जिला सचिव मंडल सदस्य कुलानंद कुमार, एमडीएम के स्थानीय नेता कैलाश स्वर्णकार और निर्मल कुमार शामिल थे.
ग्रामीणों ने भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता पर उठाये सवाल
जांच के दौरान स्कूल शिक्षा समिति के पूर्व अध्यक्ष अयोधी मुखिया, ललन दास, वार्ड सदस्य लक्ष्मी देवी सहित नुरो मुखिया, लालमोहर मुखिया, महाजन मुखिया, हरेराम दास, ललिता देवी, प्रमोद मुखिया, अमर मुखिया, सुकन मुखिया और मिथुन मुखिया समेत कई ग्रामीणों ने मध्याह्न भोजन की व्यवस्था पर सवाल उठाये.
ग्रामीणों का कहना था कि विद्यालय में रसोईया मौजूद रहने के बावजूद एनजीओ के माध्यम से तैयार भोजन स्कूल में भेजा जा रहा है. ग्रामीणों के अनुसार डॉ. भीमराव अंबेडकर दलित उत्थान एवं शिक्षा समिति द्वारा करीब 144 स्कूलों के हजारों बच्चों के लिए एक ही स्थान पर भोजन तैयार किया जाता है और फिर उसे अलग-अलग विद्यालयों में भेजा जाता है.
ग्रामीणों ने भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाये. उनका कहना था कि इतने बड़े स्तर पर भोजन कब और किन परिस्थितियों में तैयार किया जाता है, इसकी जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए. भोजन तैयार करने वाली जगह, इस्तेमाल होने वाले बर्तनों और अन्य सामग्री की स्वच्छता के साथ अनाज और सब्जियों की गुणवत्ता की नियमित जांच किस स्तर पर होती है, इसकी भी जानकारी सामने आनी चाहिए.
स्कूल में ही भोजन तैयार कराने की मांग
ग्रामीणों ने कहा कि जब प्रत्येक विद्यालय में रसोईया की व्यवस्था है, तो मध्याह्न भोजन स्कूल परिसर में ही तैयार कराया जाना चाहिए. उनका कहना था कि बच्चों को मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता से किसी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए.
ग्रामीणों ने यह भी कहा कि यदि एनजीओ के माध्यम से उपलब्ध कराये जाने वाले भोजन में बच्चों की सुरक्षा और गुणवत्ता सुनिश्चित नहीं होती है, तो वे इस व्यवस्था का विरोध करेंगे.
एमडीएम यूनियन ने व्यवस्था पर पुनर्विचार की मांग की
एमडीएम वर्कर यूनियन के राज्य महासचिव ब्यास प्रसाद यादव ने कहा कि रसोईया के मौजूद रहने के बावजूद उनसे भोजन नहीं बनवाकर एनजीओ से भोजन मंगाने की व्यवस्था पर सरकार को पुनर्विचार करना चाहिए.
उन्होंने सरकार और एनजीओ के बीच मिलीभगत का आरोप लगाते हुए मध्याह्न भोजन योजना में गड़बड़ी की आशंका जतायी. उन्होंने दावा किया कि एनजीओ के माध्यम से भोजन पहुंचाने की व्यवस्था शुरू होने के बाद जिले के अलग-अलग स्कूलों में बच्चों के बीमार पड़ने की घटनाएं सामने आती रही हैं.
ब्यास प्रसाद यादव ने आरोप लगाया कि ऐसी घटनाओं में एनजीओ की भूमिका की जांच करने के बजाय कई बार प्रधानाध्यापक और रसोईया पर कार्रवाई की जाती है. हालांकि, ये आरोप जांच के निष्कर्ष नहीं हैं और संबंधित प्रशासनिक जांच के परिणाम सामने आना बाकी है.
Basudeva School Mid Day Meal: रसोईया पर कार्रवाई वापस लेने की मांग
बासुदेवा विद्यालय की घटना का उल्लेख करते हुए उन्होंने रसोईया को हटाने तथा उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे की कार्रवाई वापस लेने की मांग की. उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन ने यदि दोनों कार्रवाई वापस नहीं ली और मध्याह्न भोजन व्यवस्था में सुधार नहीं किया, तो एमडीएम वर्कर यूनियन आंदोलन करेगा.
उन्होंने कहा कि संगठन सरकार और प्रशासन की नीतियों के खिलाफ सड़क पर उतरने को बाध्य होगा. अब इस मामले में प्रशासनिक स्तर पर घटना की जांच और मध्याह्न भोजन की व्यवस्था से जुड़े तथ्यों के सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि बच्चों के बीमार पड़ने की घटना के पीछे वास्तविक कारण क्या था.
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