पूर्व मध्य रेल (ECR) के समस्तीपुर मंडल ने रेल यात्रियों और रेलकर्मियों को स्वच्छ, सुरक्षित और हाइजीनिक पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एक बड़ा और महत्वाकांक्षी कदम उठाया है.
मंडल के अंतर्गत आने वाले स्टेशनों, रेलवे कॉलोनियों और कार्यस्थलों पर पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को आधुनिक और दोषमुक्त बनाने के लिए एक सघन अभियान चलाया जा रहा है. इस व्यापक अभियान की प्रगति पर मंडल रेल प्रबंधक (DRM) सहित मुख्यालय स्तर के वरीय अधिकारियों द्वारा सीधी निगरानी रखी जा रही है.
सहरसा और बनमनखी में आयरन की समस्या होगी खत्म
कोसी और सीमांचल क्षेत्र के भूजल में अत्यधिक आयरन (लौह तत्व) की मौजूदगी एक गंभीर समस्या रही है, जिससे नलों से निकलने वाले पानी में लालपन और दुर्गंध देखने को मिलती है.
इस समस्या के स्थायी निदान के लिए दौरम मधेपुरा स्टेशन की तर्ज पर अब सहरसा जंक्शन और पूर्णिया जिले के महत्वपूर्ण बनमनखी जंक्शन पर अत्याधुनिक 'आयरन रिमूवल प्लांट' लगाने का प्रस्ताव पारित किया गया है. इस संयंत्र के शुरू होने से पानी से अत्यधिक आयरन और हानिकारक तत्वों को पूरी तरह फिल्टर कर यात्रियों और रेलकर्मियों को उच्च गुणवत्ता वाला सुरक्षित पानी उपलब्ध कराया जाएगा.
5 स्टेशनों पर बनेंगे 50-50 हजार गैलन क्षमता के आरसीसी टैंक
पेजेल आपूर्ति को निर्बाध बनाए रखने के लिए बुनियादी ढांचे के विस्तार को भी हरी झंडी दी गई है. समस्तीपुर मंडल ने सुपौल, सरायगढ़, सिमरी बख्तियारपुर, ललितग्राम और सहरसा स्टेशनों पर 50 हजार गैलन क्षमता वाले पांच नए आरसीसी (RCC) ओवरहेड वाटर टैंक के निर्माण की प्रशासनिक स्वीकृति दे दी है.
इन विशाल जलाशयों के निर्माण से गर्मियों और त्योहारी सीजन के दौरान ट्रेनों में पानी भरने और प्लेटफॉर्मों पर यात्रियों के लिए पानी का पर्याप्त दबाव और बैकअप सुनिश्चित हो सकेगा.
357 पानी टंकियों की हुई सफाई, ऑटोमैटिक क्लोरीनीकरण पर जोर
अभियान के तहत पूरे रेल मंडल में चिन्हित किए गए कुल 795 ओवरहेड, अंडरग्राउंड और पीवीसी पानी के टैंकों में से अब तक 357 टैंकों की सघन सफाई और रासायनिक डिसइंफेक्शन का कार्य सफलता पूर्वक पूरा कर लिया गया है.
शेष बचे टैंकों की सफाई युद्धस्तर पर जारी है. इसके साथ ही पानी में बैक्टीरिया और कीटाणुओं को नष्ट करने के लिए समस्तीपुर स्टेशन की तरह अन्य प्रमुख स्टेशनों पर भी ऑटोमैटिक क्लोरीनीकरण प्लांट स्थापित करने की योजना पर काम चल रहा है.
'सोर्स से नल तक' पानी की टेस्टिंग, कॉलोनियों पर भी नजर
रेलवे बोर्ड के सख्त मानकों के अनुसार पानी की गुणवत्ता की जांच केवल पंप हाउस तक सीमित नहीं रखी जा रही है, बल्कि मुख्य स्रोत (बोरवेल) से लेकर प्लेटफॉर्म और क्वार्टरों के नलों तक पानी के नमूने लेकर लैब में परीक्षण किए जा रहे हैं.
इस जांच के आधार पर जहां भी खराबी पाई जा रही है, वहां तत्काल नए फिल्ट्रेशन सिस्टम लगाए जा रहे हैं. रेलवे कॉलोनियों और रनिंग रूम्स में रहने वाले रेल कर्मचारियों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए पूरी जल वितरण प्रणाली की नियमित समीक्षा की जा रही है, ताकि किसी भी स्तर पर दूषित पानी की आपूर्ति न हो सके.
