करोड़ों का निबंधन कार्यालय दे रहा रोज 10 लाख का राजस्व, पर जनता पानी-शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं को तरसी

सहरसा जिले के सोनवर्षाराज प्रखंड में करोड़ों की लागत से बने नए निबंधन (रजिस्ट्री) कार्यालय को शुरू हुए एक साल बीत चुका है. सरकार की तिजोरी में प्रतिदिन लाखों का राजस्व भरने वाले इस महत्वपूर्ण कार्यालय में आज भी बुनियादी सुविधाएं नदारद हैं, जिसके कारण दूर-दराज से आने वाले फरियादी और कर्मी भारी फजीहत झेलने को मजबूर हैं.

सोनवर्षाराज (सहरसा) से मुकेश कुमार सिंह की रिपोर्ट:

रोज 10 लाख की कमाई, लेकिन प्यासे बैठने को विवश हैं लोग

सोनवर्षाराज प्रखंड मुख्यालय स्थित नए निबंधन कार्यालय से बिहार सरकार को हर दिन करीब 10 लाख रुपये के राजस्व (कमाई) की प्राप्ति होती है. इसके बावजूद, यहाँ की प्रशासनिक और ढांचागत स्थिति बेहद दयनीय है. नए भवन के उद्घाटन के समय विभाग द्वारा बड़े-बड़े दावे किए गए थे कि जमीन रजिस्ट्री की प्रक्रिया को डिजिटल कर आम लोगों को कॉर्पोरेट जैसी आधुनिक सुविधाएं दी जाएंगी.

लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट है. पूरे कार्यालय परिसर में शुद्ध पेयजल (पीने के पानी) की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है. भीषण गर्मी और उमस के इस मौसम में जमीन की खरीद-बिक्री के लिए दूर-दराज के गांवों से आने वाले क्रेता-विक्रेताओं और गवाहों को घंटों प्यासा बैठना पड़ता है या महंगे दामों पर बाहर से पानी की बोतलें खरीदनी पड़ती हैं.

शौचालय न होने से महिलाओं, बुजुर्गों और दिव्यांगों की बढ़ी फजीहत

इस महत्वपूर्ण परिसर का सबसे शर्मनाक पहलू यह है कि यहाँ आने वाली महिलाओं, वृद्धों और दिव्यांगों के लिए शौचालय की कोई सुदृढ़ व्यवस्था नहीं है. रजिस्ट्री कार्यालय में डीड (दस्तावेज) तैयार होने और बायोमेट्रिक मिलान की प्रक्रिया में अक्सर पूरा दिन लग जाता है. ऐसे में शौचालय की व्यवस्था न होने से महिलाओं को भारी मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है. लोग मजबूरी में आसपास के झाड़ियों या निजी प्रतिष्ठानों का रुख करते हैं, जिसे लेकर स्थानीय ग्रामीणों और उपभोक्ताओं में निबंधन विभाग के खिलाफ भारी आक्रोश है.

बिना बिजली-पंखे के काम करने को मजबूर हैं मोहरिर और दस्तावेज लेखक

कार्यालय परिसर में न केवल आम जनता, बल्कि इस व्यवस्था की मुख्य रीढ़ माने जाने वाले मोहरिर (दस्तावेज लेखक) और वकील भी दयनीय स्थिति में काम कर रहे हैं. मोहरिलों के बैठने के लिए जो शेड या स्थान निर्धारित है, वहाँ बिजली और पंखों का कोई इंतजाम नहीं है. उमस भरी गर्मी में बिना पंखे के घंटों बैठकर दस्तावेजों का मिलान करना बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है. मोहरिलों का कहना है कि उन्होंने इस संबंध में कई बार लिखित और मौखिक शिकायतें दर्ज कराई हैं, लेकिन विभाग के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है.

अपना भवन बनने पर दूर होंगी समस्याएं: रजिस्ट्रार

स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों और व्यवसायी संघ ने जिला प्रशासन व निबंधन विभाग के आला अधिकारियों से मांग की है कि जब तक कोई बड़ा प्रोजेक्ट पास नहीं होता, तब तक जनहित में तुरंत यहाँ चापाकल, वाटर कूलर और अस्थायी बायो-टॉयलेट की व्यवस्था कराई जाए.

इस पूरे मामले पर जब निबंधन कार्यालय के रजिस्ट्रार दिव्यांशु दिब्याल से बात की गई, तो उन्होंने एक चौंकाने वाला बयान दिया. उन्होंने बताया कि तकनीकी रूप से फिलहाल कार्यालय का अपना पूर्ण स्वामित्व वाला स्थायी भवन नहीं है और विभाग द्वारा नए स्वतंत्र भवन निर्माण को लेकर प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. रजिस्ट्रार ने आश्वासन दिया कि जैसे ही विभाग का अपना विभागीय भवन पूरी तरह बनकर तैयार हो जाएगा, आम जनता और कर्मचारियों को सभी आधुनिक सुविधाएं एक ही छत के नीचे सुलभ करा दी जाएंगी.

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Published by: Divyanshu Prashant

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