Salkhua Jan Sahayog Camp : सहरसा जिले के सलखुआ प्रखंड में बिहार सरकार की जन सहयोग शिविर योजना का सकारात्मक असर अब गांवों में दिखाई देने लगा है. मंगलवार को कोपरिया और मोबारकपुर पंचायत में आयोजित शिविर में विभिन्न विभागों ने लोगों की शिकायतें सुनीं और बड़ी संख्या में आवेदनों का मौके पर ही निष्पादन किया. इससे ग्रामीणों में संतोष और प्रशासन के प्रति विश्वास बढ़ा है.
दो पंचायतों में लगा जन सहयोग शिविर
सलखुआ प्रखंड के कोपरिया एवं मोबारकपुर पंचायत में मंगलवार को जन सहयोग शिविर का आयोजन किया गया. शिविर का उद्घाटन अनुमंडल पदाधिकारी आलोक राय, बीडीओ वीरेंद्र कुमार, सीओ रवि कुमार, कोपरिया की मुखिया अमृता कुमारी और मोबारकपुर की मुखिया नजर प्रवीण सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से किया. विभिन्न विभागों के अलग-अलग काउंटर लगाकर लोगों की समस्याएं सुनी गईं.
176 आवेदन पहुंचे, अधिकांश का मौके पर हुआ समाधान
शिविर में कोपरिया पंचायत से 75 और मोबारकपुर पंचायत से 101 आवेदन प्राप्त हुए. अधिकारियों ने बड़ी संख्या में आवेदनों का मौके पर ही निष्पादन किया. जिन मामलों का तत्काल समाधान संभव नहीं था, उन्हें ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज कर निर्धारित समयसीमा के भीतर निस्तारण की प्रक्रिया शुरू की गई.
30 दिनों में शेष मामलों के समाधान का आश्वासन
बीडीओ वीरेंद्र कुमार ने बताया कि शिविर के अंतिम समय में प्राप्त या तत्काल निष्पादित नहीं हो सके आवेदनों का भी 30 दिनों के भीतर समाधान सुनिश्चित किया जाएगा. उन्होंने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य प्रत्येक पात्र व्यक्ति की समस्या का समयबद्ध समाधान करना है.
भूमि, राशन, पेंशन और बिजली से जुड़े मामलों की सुनवाई
शिविर में भूमि विवाद, राशन कार्ड, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, बिजली, पेयजल और अन्य सरकारी योजनाओं से जुड़े मामलों की सुनवाई की गई. अनुमंडल पदाधिकारी आलोक राय ने कहा कि सरकार चाहती है कि ग्रामीणों को छोटी-छोटी समस्याओं के समाधान के लिए प्रखंड या जिला मुख्यालय के चक्कर न लगाने पड़ें. इसी उद्देश्य से पंचायत स्तर पर जन सहयोग शिविर आयोजित किए जा रहे हैं.
ग्रामीणों ने कहा- समय और धन दोनों की हुई बचत
शिविर में बीपीआरओ कैलाश पासवान, राजस्व अधिकारी सचिन आनंद, बीपीएम पवन कुमार, कार्यक्रम पदाधिकारी मो. शमशुल जोहा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे. जनप्रतिनिधियों एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भी भाग लिया. ग्रामीणों ने कहा कि गांव में ही समस्याओं का समाधान होने से उनका समय और धन दोनों बचा है तथा प्रशासन के प्रति उनका भरोसा और मजबूत हुआ है.
