ठठेरा ट्रेन में तब्दील हो गयी है समस्तीपुर-सहरसा पैसेंजर ट्रेन

इन दिनों सहरसा-मानसी रेलखंड पर सुबह सवेरे एक खास दृश्य देखने को मिल रहा है, जो ग्रामीण जीवन की जमीनी हकीकत को बयां करता है.

पूरी ट्रेन की खिड़कियों पर लटका नजर आता है ठठेरा

सिमरी बख्तियारपुर. इन दिनों सहरसा-मानसी रेलखंड पर सुबह सवेरे एक खास दृश्य देखने को मिल रहा है, जो ग्रामीण जीवन की जमीनी हकीकत को बयां करता है. इन दिनों हर रोज समस्तीपुर-सहरसा पैसेंजर ट्रेन ठठेरा ट्रेन में बदल गयी है. जी हां, 55566 समस्तीपुर-सहरसा पैसेंजर ट्रेन में इन दिनों पूरी की पूरी ट्रेन की खिड़कियों पर ठठेरा ही लटका हुआ नजर आता है. यह दृश्य ट्रेन यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों के लिए भी आम हो चला है. हालांकि यह प्रक्रिया जोखिम से भी खाली नहीं है. ट्रेन की खिड़कियों में ठठेरा लटकाना न केवल खतरनाक होता है, बल्कि इससे यात्रियों को भी परेशानी होती है. बावजूद बीते कई वर्षों से यह दृश्य गर्मी के मौसम में देखने को मिल रहा है और स्थानीय प्रशासन भी इसे नजरअंदाज करता आ रहा है. बताया जाता है कि रेलखंड के विभिन्न स्टेशन की महिलाएं हर रोज 05509 सहरसा-जमालपुर पैसेंजर ट्रेन से सुबह सवेरे धमारा घाट स्टेशन पहुंचती है. ये महिलाएं धमारा के आसपास के गांवों में सिर्फ ठठेरा संग्रह के उद्देश्य से पहुंचती है और समस्तीपुर-सहरसा पैसेंजर ट्रेन से लौट जाती है. ग्रामीण इलाकों में ठठेरा की अहमियत बहुत ज्यादा होती है. यह एक प्रकार का सूखा जलावन होता है, जो खेतों से काटकर लाया जाता है. गरीब और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए यह ठठेरा कई तरह से उपयोगी होता है. इससे खाना पकाया जाता है, मवेशियों को चारा दिया जाता है और कई बार इसकी बिक्री से कुछ पैसे भी जुटा लिए जाते हैं. हर साल गर्मी के इन महीनों में जब खेत खाली होते हैं और जलावन की जरूरत बढ़ जाती है तो महिलाएं टोली बनाकर ठठेरा लेने धमारा घाट की ओर पहुंच जाती हैं. धमारा घाट से ठठेरा लाने वाली महिलाओं का कहना है कि अगर वे ऐसा न करें तो उनके घर में चूल्हा जलना मुश्किल हो जायेगा. महंगाई के इस दौर में एलपीजी गैस की कीमतें आम लोगों की पहुंच से बाहर हैं, ऐसे में यह सूखा जलावन ही उनका एकमात्र सहारा है.

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By Dipankar shriwastaw

दीपांकर श्रीवास्तव प्रिंट माध्यम में 20 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत दैनिक जागरण से की. अभी प्रभात खबर के सहरसा कार्यालय में काम कर रहे हैं. शिक्षा, अनुसंधान, कला-संस्कृति व सिनेमा में रुचि रखते हैं.

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