सहरसा से दीपांकर की रिपोर्ट: मध्य विद्यालय बलुआहा में जहरीला मध्याह्न भोजन (MDM) खाने से ढाई सौ बच्चों के बीमार होने के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है. शनिवार को उप विकास आयुक्त (DDC) की अगुवाई में अधिकारियों का एक उच्चस्तरीय दल जांच के लिए विद्यालय पहुंचा. जहां अधिकारियों ने बंद कमरे में शिक्षकों, रसोइयों और ग्रामीणों से पूछताछ की. हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया के दौरान मीडिया कर्मियों के प्रवेश पर पाबंदी रही.
दाल में सांप मिलने के बाद मचा था हड़कंप
बता दें कि तीन दिन पूर्व विद्यालय में परोसी गई दाल में मरा हुआ सांप मिलने के बाद हड़कंप मच गया था. दूषित भोजन खाने से करीब 250 बच्चों की तबीयत बिगड़ गई थी, जिन्हें आनन-फानन में पीएचसी और सदर अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था. इस घटना के बाद से ही आक्रोशित ग्रामीणों ने एनजीओ द्वारा भेजी जा रही एमडीएम सामग्री को विद्यालय में घुसने से रोक दिया है. ग्रामीणों का कहना है कि जब तक सुरक्षित भोजन की गारंटी नहीं मिलती, वे बच्चों को एमडीएम नहीं लेने देंगे.
शिक्षकों और रसोइयों पर FIR से भड़के लोग
प्रशासन द्वारा इस मामले में एनजीओ कर्मी के साथ-साथ विद्यालय के दो निर्दोष शिक्षकों और रसोइयों पर प्राथमिकी दर्ज कराई गई है. ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन मुख्य दोषी एनजीओ को बचाने के लिए शिक्षकों और रसोइयों पर दबाव बना रहा है. लोगों का कहना है कि भोजन एनजीओ से बनकर आता है, ऐसे में शिक्षकों की क्या गलती है? शनिवार को जांच के बाद डीडीसी ने कहा कि अनुसंधान जारी है और जो निर्दोष होंगे उन्हें मुक्त कर दिया जाएगा.
पुलिस की सख्ती से पनप रहा आक्रोश
दूसरी ओर, एसडीपीओ आलोक कुमार ने ग्रामीणों द्वारा एमडीएम सामग्री लौटाए जाने पर कड़ी नाराजगी जताई है. उन्होंने इसे सरकारी कार्य में बाधा डालना बताते हुए सख्त प्रशासनिक कार्रवाई का संकेत दिया है. इधर, पुलिस ने विद्यालय के सभी शिक्षकों और रसोइयों को पूछताछ के लिए थाने बुलाया है. पुलिस की इस कार्रवाई से शिक्षकों में दहशत है और ग्रामीणों के बीच भारी आक्रोश पनप रहा है, जिससे क्षेत्र में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है.
