NEP 2020 Seminar Saharsa: सहरसा के लक्ष्मीनाथ महाविद्यालय बनगांव में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के छह वर्ष पूर्ण होने पर संवादात्मक कार्यक्रम आयोजित किया गया. मुख्य अतिथि डॉ जैनेन्द्र कुमार ने कहा कि जो विद्यार्थी और शिक्षक बदलती तकनीकों के साथ स्वयं को नहीं जोड़ेंगे, वे भविष्य की प्रतिस्पर्धा में पीछे रह जाएंगे.
सहरसा. राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के छह वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर सहरसा के लक्ष्मीनाथ महाविद्यालय, बनगांव में मंगलवार को शैक्षणिक एवं संवादात्मक कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम का विषय था राष्ट्रीय शिक्षा नीति के छह वर्षों की उपलब्धियां, नवाचार एवं भविष्य की दिशा, जिसमें शिक्षकों, शिक्षकेत्तर कर्मचारियों और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भाग लिया.
कार्यक्रम का आयोजन अखिल भारतीय शिक्षा समागम के तहत किया गया और इसमें नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन, तकनीकी बदलाव, भारतीय ज्ञान परंपरा तथा भविष्य की शिक्षा व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा हुई.
तकनीक से जुड़ना अब विकल्प नहीं, आवश्यकता
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा के क्रीड़ा एवं सांस्कृतिक परिषद के उपनिदेशक तथा पीजी सेंटर, सहरसा में सहायक प्राध्यापक डॉ जैनेन्द्र कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति विद्यार्थियों और शिक्षकों को भविष्य की शिक्षा प्रणाली के अनुरूप स्वयं को तैयार करने का अवसर देती है.
उन्होंने कहा कि जो विद्यार्थी और शिक्षक बदलती तकनीकों के साथ स्वयं को नहीं जोड़ेंगे, वे आने वाले समय की प्रतिस्पर्धा में पीछे रह जाएंगे. उनके अनुसार नई शिक्षा नीति आधुनिक तकनीकों को अपनाने के साथ-साथ भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा, विज्ञान और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण तथा उस पर नए दृष्टिकोण से शोध को भी प्रोत्साहित करती है.
संसाधनों के बिना नीति का पूरा लाभ संभव नहीं
डॉ जैनेन्द्र कुमार ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने शिक्षा सुधार का व्यापक रोडमैप तैयार किया है, लेकिन इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक वित्तीय और आधारभूत संसाधन अभी पर्याप्त नहीं हैं.
उन्होंने कहा कि जब तक सरकार आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने की दिशा में गंभीरता से कार्य नहीं करेगी, तब तक नीति के उद्देश्यों को पूरी तरह धरातल पर उतारना कठिन होगा.
शिक्षा के साथ नैतिकता और चरित्र निर्माण भी जरूरी
कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो लोकेश चंद्र खां ने की, जबकि सचिव उमा शंकर खां की गरिमामयी उपस्थिति रही. कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि का मिथिला की परंपरा के अनुसार पाग और अंगवस्त्र भेंट कर स्वागत के साथ हुई.
सचिव उमा शंकर खां ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 केवल रोजगारपरक शिक्षा का दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह भारत की ज्ञान परंपरा, सांस्कृतिक विरासत, मानवीय मूल्यों और चरित्र निर्माण को भी समान महत्व देती है.
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में ज्ञान के साथ नैतिकता, अनुशासन, सामाजिक उत्तरदायित्व और भारतीय जीवन-मूल्यों का विकास होना भी उतना ही आवश्यक है.
समावेशी और विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षा पर जोर
कार्यक्रम का संचालन प्रो गणेश खां ने किया. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति शिक्षा को अधिक समावेशी, नवाचारोन्मुख और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है.
उन्होंने कहा कि नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए शिक्षकों, शिक्षण संस्थानों और सरकार के बीच बेहतर समन्वय तथा निरंतर प्रयास आवश्यक हैं.
नोडल पदाधिकारी के रूप में प्रो प्रकाश चंद्र खां मनोज ने कार्यक्रम का समन्वयन किया.
NEP 2020 Seminar Saharsa: भारतीय ज्ञान परंपरा पर भी हुई चर्चा
धन्यवाद ज्ञापन करते हुए हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो संतोष कुमार सुमन ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति भारतीय ज्ञान परंपरा को पुनर्स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है.
उन्होंने कार्यक्रम में शामिल सभी अतिथियों, शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्र-छात्राओं के प्रति आभार व्यक्त किया.
इस अवसर पर महाविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक प्रो सुबोध कुमार मिश्र, प्रो अनिल कुमार ठाकुर, प्रो विनय कुमार मिश्र, प्रो प्रकाश चंद्र मिश्रा, प्रो उदय किशोर खां, प्रो रुद्रानंद झा, डॉ आभा कुमारी, डॉ प्रेम कुमारी, प्रो भवेश खां, प्रो हरे राम बाबू, प्रो सुमन कुमार झा, राहुल कुमार खां, रोहित खां, विनीत कुमार ठाकुर, जय शंकर ठाकुर, अखिलेश कुमार, अजय कुमार चौधरी, सुबोध कुमार झा, शुभंकर झा, विष्णु कुमार मिश्र और शिवम कुमार ठाकुर सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, शिक्षकेत्तर कर्मचारी और विद्यार्थी उपस्थित रहे.
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