Saharsa News: सहरसा के नवहट्टा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सरकारी दवाओं के एक्सपायर होने और मरीजों को अस्पताल से बाहर की दवाएं लिखे जाने के मामले ने अब प्रशासन का ध्यान खींचा है. प्रभात खबर डिजिटल में खबर प्रकाशित होने के बाद जिलाधिकारी दीपेश कुमार ने मामले को गंभीरता से लिया है. डीएम ने पूरे प्रकरण की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित करते हुए एक सप्ताह के भीतर स्पष्ट मंतव्य के साथ रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है.
मामला इसलिए भी अहम है, क्योंकि सरकारी अस्पतालों में आने वाले गरीब और जरूरतमंद मरीजों को सरकार की ओर से नि:शुल्क दवाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था है. ऐसे में अस्पताल में दवाएं उपलब्ध रहने के बावजूद मरीजों को बाहर से दवा खरीदने की जरूरत पड़ रही है या सरकारी दवाएं स्टोर में पड़े-पड़े एक्सपायर हो रही हैं, तो इसकी वास्तविक वजह जांच के बाद ही सामने आएगी.
खबर प्रकाशित होने के बाद प्रशासन ने लिया संज्ञान
नवहट्टा सीएचसी में सरकारी दवाओं के एक्सपायर होने और मरीजों को बाहर की दवाएं लिखे जाने की शिकायत सामने आने के बाद प्रभात खबर डिजिटल ने इस मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया था. खबर के सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश जारी किये हैं.
डीएम के निर्देश के बाद अब यह जांच होगी कि अस्पताल में दवाओं के रखरखाव, वितरण और उपयोग की व्यवस्था किस तरह संचालित हो रही थी और कहीं किसी स्तर पर लापरवाही तो नहीं हुई.
तीन अधिकारी करेंगे पूरे मामले की जांच
जिलाधिकारी द्वारा गठित तीन सदस्यीय जांच टीम में वरीय उप समाहर्ता सहरसा सिमरन, सिविल सर्जन सहरसा तथा प्रखंड विकास पदाधिकारी नवहट्टा को शामिल किया गया है.
तीनों अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ मामले की विस्तृत जांच करने का निर्देश दिया गया है. जांच टीम को केवल मौखिक शिकायतों के आधार पर रिपोर्ट तैयार नहीं करनी है, बल्कि संबंधित दस्तावेज और साक्ष्य भी जुटाने होंगे.
मरीजों की पर्ची और एक्सपायर दवाओं की होगी जांच
डीएम के जांच निर्देश में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को शामिल किया गया है. टीम अस्पताल में मरीजों को लिखी गयी दवा की पर्चियों की जांच करेगी. इसके साथ ही स्टोर में मौजूद एक्सपायर दवाओं की एक्सपायरी तिथि और उनकी स्थिति का भी सत्यापन किया जाएगा.
जांच के दौरान एक्सपायर दवाओं के छायाचित्र सहित अन्य जरूरी साक्ष्य भी रिपोर्ट के साथ संलग्न करने होंगे. इसके बाद जांच टीम को पूरे मामले पर अपना स्पष्ट मंतव्य देते हुए एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट सौंपनी होगी.
सरकारी दवा रहते बाहर से खरीदने का क्यों लगा आरोप?
पूर्व में स्थानीय लोगों और मरीजों की ओर से आरोप लगाया गया था कि अस्पताल में सरकारी दवाएं उपलब्ध रहने के बावजूद कुछ मरीजों को बाहर की मेडिकल दुकानों से दवा खरीदने के लिए पर्ची दी जा रही है.
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, अस्पताल के स्टोर में कई सरकारी दवाएं लंबे समय से रखी हुई थीं. समय पर मरीजों को वितरित नहीं किये जाने के कारण इनमें से कुछ दवाएं एक्सपायर हो गयीं.
यदि जांच में यह स्थिति सही पायी जाती है, तो सवाल यह भी उठेगा कि मरीजों के लिए उपलब्ध करायी गयी सरकारी दवाओं का समय पर उपयोग क्यों नहीं हुआ और दवाओं की एक्सपायरी पर निगरानी किस स्तर पर की जा रही थी.
गरीब मरीजों पर पड़ सकता है सीधा असर
सरकारी अस्पताल में इलाज कराने वाले बड़ी संख्या में मरीज आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं. ऐसे मरीजों के लिए अस्पताल से मुफ्त दवा मिलना इलाज के खर्च को कम करने का महत्वपूर्ण माध्यम है.
अगर उन्हें अस्पताल में दवा उपलब्ध नहीं होने या बाहर से दवा खरीदने की मजबूरी होती है, तो इलाज का अतिरिक्त खर्च सीधे परिवार की जेब पर पड़ता है. यही वजह है कि इस मामले में जांच रिपोर्ट का इंतजार स्थानीय लोगों के साथ मरीजों और उनके परिजनों को भी है.
कमीशनखोरी के आरोप की भी होगी पड़ताल
शिकायतकर्ताओं ने बाहर की दवाएं लिखे जाने के पीछे कथित कमीशनखोरी की आशंका भी जतायी थी. हालांकि, यह अभी केवल आरोप है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
अब जांच टीम के सामने यह पता लगाने की जिम्मेदारी होगी कि मरीजों को बाहर की दवाएं किन परिस्थितियों में लिखी गयीं, अस्पताल में संबंधित दवाएं उपलब्ध थीं या नहीं और दवाओं की खरीद एवं वितरण की प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का पालन हुआ या नहीं.
Saharsa News: रिपोर्ट से खुलेगा लापरवाही का राज
फिलहाल पूरे मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगा. जांच टीम को एक सप्ताह का समय दिया गया है. रिपोर्ट में यदि किसी स्तर पर लापरवाही, नियमों की अनदेखी या अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों और कर्मियों पर कार्रवाई की संभावना बन सकती है.
अब निगाहें जांच टीम की रिपोर्ट पर टिकी हैं. रिपोर्ट यह स्पष्ट करेगी कि नवहट्टा सीएचसी में सरकारी दवाओं के एक्सपायर होने और मरीजों को बाहर से दवा लेने की नौबत आखिर क्यों आयी.
