सहरसा शहर में बारिश के दिनों में उत्पन्न होने वाली भयावह जलजमाव की समस्या का मुद्दा बिहार विधान परिषद में गूंजा. कोसी क्षेत्र के विधान पार्षद (MLC) डॉ. अजय कुमार सिंह द्वारा पूछे गए तारांकित प्रश्न के जवाब में राज्य सरकार ने स्वीकार किया कि सहरसा शहर के कई हिस्सों में जलनिकासी की गंभीर समस्या बनी हुई है. सरकार ने सदन को बताया कि नगर निगम क्षेत्र में जलजमाव से मुक्ति दिलाने के लिए ₹137.90 करोड़ की 'स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज योजना (फेज-2)' स्वीकृत है, लेकिन पटना हाईकोर्ट के आदेश के कारण फिलहाल इस पर रोक लगी हुई है.
MLC डॉ. अजय कुमार सिंह ने सरकार से पूछे तीखे सवाल
विधान पार्षद डॉ. अजय कुमार सिंह ने ध्यानाकर्षण के माध्यम से सरकार से पूछा था कि:
- नारकीय स्थिति से कब मिलेगी मुक्ति: क्या सहरसा शहर बारिश के दिनों में जलजमाव के कारण नारकीय स्थिति झेलने को मजबूर है?
- प्रभावित इलाके: न्यू कॉलोनी, नया बाजार, सराही, गांधी पथ, कृष्णा नगर, कचहरी रोड, कुंवर टोला, विद्यापति नगर, फकीर टोला, मीर टोला और बटराहा जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में जलनिकासी की क्या व्यवस्था है?
- मास्टर प्लान की मांग: एमएलसी ने सरकार से आधुनिक जलनिकासी व्यवस्था, बड़े नालों के जाल, सम्प हाउस (Sump House) और मास्टर प्लान की अद्यतन स्थिति की जानकारी मांगी.
सरकार का जवाब: फेज-1 पूरा, 47.82% वार्डों में बनी व्यवस्था
राज्य सरकार की ओर से सदन में दिए गए आधिकारिक जवाब में बताया गया:
- फेज-1 की स्थिति: बुडको (BUDCO) द्वारा स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज योजना के प्रथम चरण का काम 12 अगस्त 2022 को ही पूरा कर लिया गया था, जिससे शहर के 13 वार्डों को जलनिकासी से जोड़ा गया.
- मुख्यमंत्री समग्र शहरी विकास योजना: इस योजना के तहत 9 अन्य वार्डों में नालों का निर्माण कराया गया.
- वर्तमान कवरेज: सहरसा नगर निगम का कुल 47.82% क्षेत्र फिलहाल नाला निर्माण से आच्छादित है, जबकि शेष 52.18% वार्डों में नाला बनना बाकी है.
₹137.90 करोड़ की फेज-2 योजना हाईकोर्ट में क्यों अटकी?
सरकार ने बताया कि शेष 52.18% वार्डों को जलजमाव से राहत दिलाने के लिए मुख्यमंत्री की प्रगति यात्रा के दौरान घोषित स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज योजना (फेज-2) को प्रशासनिक स्वीकृति दी गई थी:
- योजना की लागत: ₹137 करोड़ 90 लाख 39 हजार 261 रुपये.
- स्वीकृति और स्टे ऑर्डर: बुडको द्वारा 11 सितंबर 2025 को लेटर ऑफ एक्सेप्टेंस (LoA) जारी किया गया था. हालांकि, 16 सितंबर 2025 को पटना उच्च न्यायालय के आदेश के बाद इसके एकरारनामा (Agreement) पर रोक लगा दी गई.
- आगे की कार्रवाई: बुडको ने न्यायालय में अपना प्रतिशपथ पत्र (Counter Affidavit) दाखिल कर दिया है. जैसे ही हाईकोर्ट से अंतिम आदेश प्राप्त होगा, निर्माण कार्य तुरंत शुरू करा दिया जाएगा.
