मिथिला और कोसी की पावन धरा पर सहरसा जिले के महिषी प्रखंड में स्थित मां उग्रतारा का प्राचीन मंदिर सनातन आस्था, तंत्र साधना और शक्ति उपासना का प्रख्यात वैश्विक केंद्र माना जाता है. न केवल कोसी क्षेत्र, बल्कि पूरे बिहार सहित देश के कोने-कोने से श्रद्धालु, तांत्रिक और साधक यहां मनोकामना पूर्ति और शक्ति अर्जन के लिए शीश नवाने पहुंचते हैं.
मान्यता है कि भगवती उग्रतारा के दरबार में सच्चे मन से लगाई गई अर्जी कभी निष्फल नहीं जाती और मां अपने भक्तों के समस्त कष्टों व विघ्न-बाधाओं का शमन कर सुख-समृद्धि का वरदान देती हैं. सामान्य दिनों में भी यहां भक्तों का तांता लगा रहता है, जबकि नवरात्र एवं मंगलवार के विशेष अवसरों पर यहां का धार्मिक और आध्यात्मिक परिवेश बेहद अलौकिक हो उठता है.
आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र, स्वतः झुक जाता है श्रद्धालुओं का शीश
महिषी स्थित यह शक्तिपीठ आस्था और आध्यात्म का अद्भुत संगम है. पौराणिक और ऐतिहासिक दृष्टिकोण से यह स्थल आदि काल से ही उच्च कोटि की तांत्रिक साधना का प्रमुख केंद्र रहा है. मंदिर के मुख्य तोरण द्वार में प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं को एक दिव्य व सकारात्मक आध्यात्मिक ऊर्जा की प्रत्यक्ष अनुभूति होती है.
गर्भगृह में मां उग्रतारा की भव्य व तेजस्वी प्रतिमा के सम्मुख पहुंचते ही भक्तों की आंखें श्रद्धा से नम हो जाती हैं. हाल के वर्षों में स्थानीय प्रशासन और न्यास समिति द्वारा मंदिर परिसर का व्यापक सौंदर्यीकरण कराया गया है, जिससे इस पावन धाम की भव्यता, आकर्षण और दर्शन की व्यवस्था में काफी सुधार आया है.
नवरात्र में 24 घंटे भक्ति का प्रवाह, बलि प्रथा की है मान्यता
शारदीय व वासंतिक नवरात्र के पावन नौ दिनों के दौरान मंदिर का स्वरूप किसी महातीर्थ में तब्दील हो जाता है. भोर की मंगला आरती से लेकर देर रात तक अखंड दीप प्रज्वलन, दुर्गा सप्तशती के वैदिक पाठ और भजन-कीर्तन का दौर अनवरत चलता रहता है, जिससे पूरा परिसर भक्तिमय माहौल में डूबा रहता है.
पर्व-त्योहारों पर मां उग्रतारा का सुगंधित पुष्पों, पारंपरिक आभूषणों और नवीन वस्त्रों से नयनाभिराम शृंगार किया जाता है. इस सिद्ध पीठ में प्राचीन काल से बलि प्रथा की धार्मिक मान्यता चली आ रही है. मन्नत पूरी होने पर दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु यहां छाग अथवा पाड़ा की बलि अर्पित कर मां का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं. शाम के समय शंखध्वनि और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच होने वाली महाआरती में सैकड़ों श्रद्धालु शामिल होते हैं.
धार्मिक पर्यटन के नक्शे पर तेजी से उभर रहा महिषी धाम
मां उग्रतारा मंदिर धार्मिक पर्यटन के लिहाज से बिहार के सबसे प्रमुख और ऐतिहासिक स्थलों में गिना जाता है. यहां आने वाले तीर्थयात्री न केवल दर्शन-पूजन करते हैं, बल्कि महाविद्वान मंडन मिश्र और आदिशंकराचार्य के ऐतिहासिक शास्त्रार्थ की साक्षी रही इस पावन भूमि की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से भी रूबरू होते हैं.
स्थानीय जनमानस का अटूट विश्वास है कि भगवती उग्रतारा के साक्षात वास के कारण ही समूचे कोसी अंचल पर विपत्तियों के बीच भी शांति, सुरक्षा और समृद्धि की कृपा निरंतर बनी रहती है. यही वजह है कि यहां सालभर श्रद्धालुओं और शोधार्थियों का निरंतर आगमन बना रहता है.
