Mahakal Baba Jalandhar Nath: सहरसा के सौरबाजार प्रखंड स्थित रामपुर गांव में तिलावे नदी तट पर विराजमान स्वयंभू अंकुरित महाकाल बाबा जालंधर नाथ का सावन में भव्य श्रृंगार और विशेष पूजा-अर्चना की गई. मुंगेर और अगुवानी घाट से गंगाजल लेकर पहुंचे डाक बम, पैदल बम और वाहन बम श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि की कामना की.
सहरसा. सावन के पवित्र महीने में मिथिला क्षेत्र के प्रसिद्ध शिवधामों में आस्था का सैलाब उमड़ रहा है. इसी कड़ी में सहरसा जिले के सौरबाजार प्रखंड अंतर्गत गम्हरिया पंचायत के रामपुर गांव स्थित स्वयंभू अंकुरित महाकाल बाबा जालंधर नाथ मंदिर में मंगलवार को भगवान शिव का महाकाल स्वरूप में भव्य श्रृंगार किया गया. मंदिर परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं और पूरे दिन जलाभिषेक, रुद्राभिषेक तथा विशेष पूजा-अर्चना का सिलसिला चलता रहा.
महाकाल स्वरूप में हुआ बाबा का विशेष श्रृंगार
बाबा जालंधर नाथ सेवा समिति के शैलेश कुमार झा और मंदिर के पुजारी सत्यम ठाकुर ने पंचोपचार पूजन के साथ भगवान शिव का महाकाल स्वरूप श्रृंगार संपन्न कराया. श्रृंगार के बाद मंदिर में विशेष आरती हुई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया. भक्तों ने गंगाजल, बेलपत्र, धतूरा और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और कल्याण की प्रार्थना की.
मंदिर परिसर में हर-हर महादेव के जयघोष और वैदिक मंत्रोच्चार से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा. स्थानीय लोगों के अनुसार सावन के प्रत्येक दिन यहां विशेष श्रृंगार पूजा और भव्य आरती का आयोजन किया जाता है.
मुंगेर और अगुवानी घाट से पहुंचे कांवरिया
सेवा समिति के शैलेश कुमार झा ने बताया कि यह मंदिर तिलावे नदी के तट पर आरण और बरदाहा की सीमा से सटे क्षेत्र में स्थित है. सामान्य दिनों में भी यहां दूर-दराज से श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं, लेकिन श्रावण माह में श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है.
उन्होंने बताया कि सैकड़ों डाक बम, पैदल बम और वाहन बम मुंगेर घाट और अगुवानी घाट से गंगाजल लेकर बाबा का जलाभिषेक करने पहुंचते हैं. सावन के दौरान मंदिर परिसर देर रात तक भक्तों की आवाजाही से गुलजार रहता है.
मंदिर का इतिहास और पुरातात्विक महत्व
स्थानीय मान्यता के अनुसार यह शिवलिंग आदिकालीन है और इसका संबंध असुर सम्राट जालंधर की कथा से जोड़ा जाता है. ग्रामीणों का कहना है कि मंदिर परिसर में पूर्व में हुई खुदाई के दौरान कई शिलालेख और प्राचीन अवशेष मिले थे, लेकिन संरक्षण के अभाव में वे नष्ट हो गए.
ग्रामीणों और सेवा समिति के सदस्यों का मानना है कि यदि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग यहां वैज्ञानिक सर्वेक्षण कराए, तो क्षेत्र से कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और पुरातात्विक धरोहरों का पता चल सकता है. इससे यह स्थल धार्मिक महत्व के साथ-साथ पर्यटन और इतिहास के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है.
Mahakal Baba Jalandhar Nath: स्थानीय लोगों की सक्रिय भागीदारी
श्रृंगार पूजा और नियमित पूजन में प्रधान पुजारी गौरीशंकर ठाकुर के साथ सेवा समिति के चंद्रशेखर मिश्र उर्फ मनाय मिश्र, सूरज कुमार चुन्नू, नंदू दास, शंकर जी, संजीव कुमार झा, खुशी भारद्वाज, नटवर कुमार झा, रजनीश कुमार, छोटू पौदार, नीरज पौदार, अनिल पौदार, सोनी कुमार साह, विंदेश्वरी तांती, राम गुलाम तांती, नागो साह, कामो राम, भजन साह, बसंत लाल साह, विजेंद्र साह, ललित साह, कैलाश यादव, सिकंदर यादव, सितेश यादव, रिक्की कुमार झा, अभिषेक कुमार जागो और शिवम कुमार बिल्लू सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने सक्रिय योगदान दिया.
श्रद्धालुओं का विश्वास है कि सावन में महाकाल बाबा जालंधर नाथ के दर्शन और जलाभिषेक से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. यही कारण है कि हर वर्ष इस मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है.
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