धार्मिक महत्ता, तांत्रिक साधना और अद्भुत आध्यात्मिक वातावरण के लिए विख्यात इस मंदिर में सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा. श्रद्धालुओं ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मां चंडिका की पूजा-अर्चना की और परिसर में दीप प्रज्वलित कर अपने परिवार की सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस दरबार से कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं लौटता है.
प्राचीन सिद्धपीठ में गूंजी शंखध्वनि, महाआरती में उमड़े भक्त
विराटपुर चंडिका स्थान में प्रतिदिन भक्तों को एक अलौकिक शांति का अनुभव होता है:
- वैदिक अनुष्ठान: मंगलवार के विशेष अवसर पर सुबह से ही मंदिर के गर्भगृह में विशेष विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मां की आराधना की गई.
- भक्तिमय संध्या: शाम के समय मंदिर परिसर आकर्षक रोशनी से नहा उठता है. भव्य महाआरती के दौरान घंटों और शंखध्वनि की गूंज से पूरा वातावरण दिव्य और सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए.
नवरात्र और अमावस्या पर दिखता है भव्य नजारा
स्थानीय लोगों और मंदिर प्रबंधन के अनुसार, विशेष तिथियों पर यहां का महत्व कई गुना बढ़ जाता है:
- श्रद्धालुओं का रेला: सामान्य दिनों के मुकाबले नवरात्र, अमावस्या और दुर्गा पूजा के अवसरों पर सुबह से देर रात तक भजन-कीर्तन का दौर चलता है.
- भव्य श्रृंगार: विशेष अवसरों पर माता रानी का अलौकिक और भव्य श्रृंगार किया जाता है. मन्नत पूरी होने पर दूर-दराज से आने वाले भक्त यहां आकर विशेष प्रसाद और छप्पन भोग अर्पित करते हैं.
धार्मिक आस्था के साथ स्थानीय पर्यटन का भी बड़ा केंद्र
विराटपुर स्थित मां चंडिका स्थान जिले में धार्मिक आस्था का मुख्य केंद्र होने के साथ-साथ स्थानीय पर्यटन के लिहाज से भी काफी महत्वपूर्ण स्थान रखता है. हाल के वर्षों में प्रशासन और स्थानीय स्तर पर श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए परिसर की साफ-सफाई और बुनियादी सुविधाओं में व्यापक सुधार किए गए हैं, जिससे यहां आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं को सुगमता हो रही है.
