Lumpy Skin Disease : पतरघट प्रखंड के विभिन्न गांवों और बस्तियों में इन दिनों लंपी स्किन डिजीज का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है. कई मवेशियों के शरीर पर गांठें, चकत्ते और घाव उभर रहे हैं. इसके साथ ही तेज बुखार, कमजोरी और भूख कम लगने जैसी समस्याएं भी देखी जा रही हैं. बीमारी के बढ़ते मामलों से पशुपालकों में दहशत का माहौल है और वे इलाज के लिए निजी चिकित्सकों एवं राजकीय पशु चिकित्सालय का सहारा ले रहे हैं.
दूध उत्पादन घटने से बढ़ी आर्थिक चिंता
पशुपालकों का कहना है कि बीमारी का सबसे अधिक असर दूध देने वाली गायों और छोटे बछड़ों पर पड़ रहा है. संक्रमित पशुओं का दूध उत्पादन अचानक कम हो गया है, जिससे दुग्ध व्यवसाय से जुड़े परिवारों की आय प्रभावित हो रही है. ग्रामीणों का कहना है कि यदि बीमारी पर जल्द नियंत्रण नहीं हुआ तो इसका असर पूरे क्षेत्र की ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है.
दवाओं की मांग बढ़ी, चिकित्सकों की सलाह जरूरी
स्थानीय पशु दवा विक्रेताओं के अनुसार लंपी बीमारी से जुड़ी दवाओं की मांग अचानक बढ़ गई है. कई पशुपालक लगातार दवा खरीदने पहुंच रहे हैं, जिससे कुछ दवाओं की उपलब्धता प्रभावित होने लगी है. दवा विक्रेताओं ने पशुपालकों से बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा लेने के बजाय पशु चिकित्सकों से संपर्क करने की अपील की है.
पशुपालन विभाग ने बढ़ाई निगरानी
राजकीय पशु चिकित्सालय पतरघट के पशु चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. शशिभूषण प्रसाद ने बताया कि लंपी स्किन डिजीज एक विषाणुजनित बीमारी है, जो मुख्य रूप से मच्छरों, मक्खियों और अन्य रक्त चूसने वाले कीटों के माध्यम से फैलती है. विभाग की टीमें प्रभावित गांवों का भ्रमण कर पशुपालकों को बीमारी की पहचान, बचाव और उपचार के बारे में जागरूक कर रही हैं. साथ ही संक्रमित पशुओं को अलग रखने, पशुशालाओं की नियमित सफाई, कीटनाशकों के छिड़काव तथा स्वच्छ पानी और पौष्टिक चारा उपलब्ध कराने की सलाह दी जा रही है.
समय पर इलाज और जागरूकता ही बचाव का उपाय
पशु चिकित्सकों के अनुसार लंपी स्किन डिजीज मनुष्यों में नहीं फैलती, लेकिन पशुधन के लिए गंभीर आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती है. विशेषज्ञों ने कहा कि किसी भी पशु में तेज बुखार, शरीर पर गांठें, त्वचा पर घाव या दूध उत्पादन में कमी जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत राजकीय पशु चिकित्सालय या मोबाइल वेटनरी यूनिट से संपर्क करना चाहिए. ग्रामीणों ने भी प्रभावित गांवों में विशेष चिकित्सा शिविर, पर्याप्त दवा उपलब्ध कराने और जागरूकता अभियान तेज करने की मांग की है.
