दो परिवार की कटुता को समाप्त करता है लोक अदालतः एडीजे प्रथम

दो परिवार की कटुता को समाप्त करता है लोक अदालतः एडीजे प्रथम

एडीजे प्रथम, डीएम व एसपी ने किया राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्घाटन सहरसा . व्यवहार न्यायालय परिसर के टेन कोर्ट बिल्डिंग के ग्राउंड फ्लोर पर शनिवार को लोक अदालत का आयोजन किया गया. राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्घाटन एडीजे प्रथम रंजूला भारती, जिलाधिकारी सह उपाध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार दीपेश कुमार, पुलिस अधीक्षक सह सदस्य जिला विधिक सेवा प्राधिकार हिमांशु, एडीजे द्वितीय प्रेमचंद्र वर्मा, सीजेएम अश्विनी कुमार, डीएलएसए प्रभारी सचिव निशा कुमारी, जिला विधिवेत्ता संघ अध्यक्ष विनोद कुमार झा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया. उद्घाटन समारोह में एडीजे प्रथम रंजूला भारती ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत दो परिवार की कटुता को समाप्त कर खुशियां लाती है. आने वाली पीढ़ियों की वैमनस्यता समाप्त करता है. जहां आपस में द्वेष व वैमनष्य होता है, उस घर के वासी दुखी व विपन्न हो जाते हैं. उन्होंने कहा कि छोटी छोटी बातों पर ध्यान नहीं नहीं देना चाहिए. छोटे-छोटे मामले समाप्त होने से अपने आप बड़े मुकदमे समाप्त हो जाते हैं. राष्ट्रीय लोक अदालत जनता की अदालत है, आपकी अपनी अदालत है. इसका फैसला अंतिम फैसला होता है. कोई हार जीत नहीं होती है. इसमें दोनों पक्षों की जीत होती है. इसमें कोई भी पक्ष हारता नहीं है. संघ अध्यक्ष विनोद कुमार झा ने बैंक अधिकारियों से अनुरोध करते कहा कि ऋण धारकों के प्रति लचीला रुख अपनाया जाये. जिससे ज्यादा से ज्यादा मामले का निष्पादन हो सके. जिला विधिक सेवा प्राधिकार प्रभारी सचिव निशा कुमारी ने कहा कि कोर्ट आने जाने में जो समय हम लगाते हैं, उसे दूसरे कार्यों में लगायें तो ज्यादा लाभ होगा. समझौता के आधार पर मुकदमो का निस्तारण करना लोक अदालत का मकसद है. जिसमें पक्षकारों के बीच शांति स्थापित होती है. अपने छोटे-छोटे मुकदमे को समाप्त कर खुशी खुशी घर जायें. लोक अदालत में सुलहनीय वादों के त्वरित निष्पादन के लिए कुल दस बेंचों का गठन किया गया. जिसमें 10 पीठासीन पदाधिकारी नियुक्त किया गया.

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By Dipankar Shriwastaw

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