बच्चों को दुनियावी शिक्षा के साथ-साथ दीनी तालीम भी देने की अपील

प्रखंड के हरेवा गांव स्थित मदरसा दारुल उलूम फैजान वारिस के प्रांगण में सरकार वारिसे पाक कॉन्फ्रेंस एवं दस्तारबंदी जलसा का आयोजन किया गया.

हरेवा में सरकार वारिसे पाक कॉन्फ्रेंस व दस्तारबंदी जलसा संपन्न, नौ छात्रों को पहनाई गयी दस्तार

इलाके में धार्मिक जागरूकता, शिक्षा के महत्व और आपसी सद्भाव का संदेश प्रसारित

सलखुआ. प्रखंड के हरेवा गांव स्थित मदरसा दारुल उलूम फैजान वारिस के प्रांगण में सरकार वारिसे पाक कॉन्फ्रेंस एवं दस्तारबंदी जलसा का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता मौलाना सैयद साजिद अशरफ ने की. जलसा की शुरुआत मदरसे के शिक्षक कारी अब्दुल कादिर नूरी द्वारा पवित्र कुरआन की तिलावत से हुई, जबकि संचालन की जिम्मेदारी मौलाना तुफैल अहमद शम्सी ने निभाई. कार्यक्रम में झारखंड के मधुपुर से हबीबुल्लाह नूरी, हबीबपुर से मेराज वारसी, मधेपुरा से फरयाद शाही, सीतामढ़ी से हसनैन रजा मदनी तथा भागलपुर से मौलाना सैफ खालिद अशरफी ने नात-ए-पाक पेश की. इनकी मधुर और भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने उपस्थित लोगों के दिलों में इश्क-ए-रसूल की रोशनी भर दी. मुख्य वक्ता डॉ सैयद शाह जलालुद्दीन अशरफ उर्फ कादरी मियां ने अपने संबोधन में हजरत मखदूम अशरफ जहांगीर समनानी के जीवन और शिक्षाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे केवल एक महान सूफी संत ही नहीं, बल्कि उच्च कोटि के विद्वान भी थे.

अल्लाह के रसूल की मुहब्बत को अपने दिलों में बसाएं

कादरी मियां ने शिष्यत्व की भावना पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सच्चा शिष्य वही है, जो अपने अहंकार को त्यागकर अपने गुरु का सम्मान करे. उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों को दुनियावी शिक्षा के साथ-साथ दीनी तालीम भी अवश्य दें. उन्होंने हदीस का हवाला देते हुए कहा कि एक हाफिज-ए-कुरआन के माता-पिता को कयामत के दिन ताज पहनाया जायेगा. उन्होंने कहा कि अल्लाह के रसूल की मुहब्बत को अपने दिलों में बसाना चाहिए, क्योंकि कुरआन कहता है, तुम्हारे लिए अल्लाह के रसूल में बेहतरीन नमूना मौजूद है. सभा को संबोधित करते हुए सैयद शाह ओहदुद्दीन मोआज अशरफ मिस्बाही अजहरी ने देश की एकता और आपसी भाईचारे को मजबूत करने का आह्वान किया. वहीं मौलाना तहसीन रजा मिस्बाही ने समाज में दीनी बुनियादों को सशक्त बनाने पर बल देते हुए कहा कि घरों में कुरआन की तिलावत और धार्मिक माहौल को बढ़ावा देना समय की अहम जरूरत है. उन्होंने कहा कि हाफिज-ए-कुरआन और उलेमा समाज के बौद्धिक और नैतिक पथप्रदर्शक होते हैं. दस्तारबंदी प्राप्त करने वाले छात्रों में मो कैसर आलम, मो अबू सईद, मो जफर आलम, मो मुश्ताक, अहमद फराज, हाफिज सैयद सालेह अशरफ, मो आजाद रजा, मो समीर मंजर एवं मो इकबाल रजा शामिल हैं. कार्यक्रम का समापन सलातो-सलाम और कादरी मियां की भावपूर्ण दुआ के साथ हुआ. इस मौके पर सैयद सुल्तान अशरफ, मदरसा अध्यक्ष अलहाज मो शौकत अली, प्रिंसिपल मौलाना कैसर जमाल मिस्बाही, हाफिज मो नकी अहमद, मौलाना अफरोज आलम जामेई, मौलाना अशरफ वारसी, मौलाना शौकत रेहानी, मौलाना आमिर अशरफी, कारी अब्दुल कादिर नूरी, मौलवी शहरयार, हाफिज मो दानिश, मास्टर बदरुल हसन, मास्टर शाहनवाज वारसी, मौलाना बजले वारिस सहित बड़ी संख्या में उलेमा, गणमान्य लोग और हरेवा गांव के युवा मौजूद रहे.

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