11 हजार दीपों से जगमगाया शंकर चौक पोखर | Prabhat Khabar Network

सहरसा के शंकर चौक पर उतरा काशी का गंगा घाट: 11 हजार दीपों से जगमगाया पोखर

सहरसा के शंकर चौक पर 11 हजार दीयों से जगमगाया पोखर घाट. 15 हजार से अधिक श्रद्धालु पहुंचे, काशी की तरह हुई महाआरती.

कोसी अंचल के प्रसिद्ध धार्मिक आयोजनों में शुमार सहरसा के शंकर चौक स्थित गणेश सेवा मंडल के 12 दिवसीय गणेश महोत्सव के आठवें दिन सोमवार की शाम आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रही.

महोत्सव के विशेष अवसर पर शंकर चौक पोखर के तट पर भव्य दीप यज्ञ और पारंपरिक गंगा महाआरती का विराट आयोजन किया गया. 11 हजार प्रज्वलित दीपों की स्वर्णिम रोशनी से पूरा पोखर घाट जगमगा उठा. वैदिक ऋचाओं के सस्वर पाठ, शंखध्वनि और घंटों-घड़ियालों की गूंज के बीच संपन्न हुई इस महाआरती में 15 हजार से अधिक श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा.

महाआरती

बनारस के आचार्यों ने कराया पूजन, साकार हुई काशी के दशाश्वमेध घाट की छटा

महाआरती को पूरी तरह काशी की पारंपरिक शैली में संपन्न कराने के लिए धर्मनगरी वाराणसी (बनारस) से विशेष आचार्यों का दल सहरसा पहुंचा था.

पीतांबर वस्त्रों में सुसज्जित आचार्यों ने जब विशाल पंचप्रदीप उठाकर मां गंगा और विघ्नहर्ता भगवान श्रीगणेश की महाआरती शुरू की, तो पूरा माहौल भक्ति के चरम पर पहुंच गया. पोखर के चारों तरफ सजे 11 हजार दीपकों की आभा और रंग-बिरंगी विद्युत सज्जा के बीच ऐसा आलौकिक दृश्य उपस्थित हुआ, मानो सहरसा के शंकर चौक पोखर पर काशी के दशाश्वमेध घाट की भव्यता साक्षात उतर आई हो.

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महाआरती

महिला व पुरुष स्वयंसेवकों ने संभाली व्यवस्था की कमान

इस विशाल धार्मिक समागम को अनुशासित और व्यवस्थित बनाए रखने में गणेश सेवा मंडल के स्वयंसेवकों ने अनुकरणीय भूमिका निभाई.

महिला स्वयंसेवकों की टीम ने घाटों की सीढ़ियों पर रंगोली व दीपों की आकर्षक शृंखला सजाने, दीप प्रज्वलन और भगवान गणपति के नयनाभिराम श्रृंगार की संपूर्ण जिम्मेदारी संभाली. वहीं, पुरुष कार्यकर्ताओं ने मंदिर व घाट परिसर की सघन स्वच्छता, कतारबद्ध दर्शन, सुरक्षा निगरानी और महाप्रसाद की पैकिंग व वितरण में दिन-रात एक कर दिया.

महाआरती

भव्य महाप्रसाद वितरण के साथ संपन्न हुआ आठवां दिन

पोखर घाट और मंदिर प्रांगण को ताजे फूलों, विदेशी गुब्बारों और एलईडी रोशनियों से अत्यंत आकर्षक रूप में सजाया गया था. आरती के दौरान हजारों श्रद्धालुओं ने एक साथ हाथ जोड़कर सामूहिक रूप से स्तुति गान किया.

महाआरती के समापन के पश्चात मंडल की ओर से उपस्थित सभी 15 हजार से अधिक श्रद्धालुओं के बीच सुव्यवस्थित ढंग से शुद्ध घी के मोदक और महाप्रसाद का वितरण किया गया. आस्था, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक वैभव का यह समागम पूरे कोसी क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है.

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लेखक के बारे में

By दीपांकर श्रीवास्तव

दीपांकर श्रीवास्तव प्रिंट माध्यम में 20 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत दैनिक जागरण से की. अभी प्रभात खबर के सहरसा कार्यालय में काम कर रहे हैं. शिक्षा, अनुसंधान, कला-संस्कृति व सिनेमा में रुचि रखते हैं.

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