सहरसा में दूध की छांकी पीने से चार बच्चे समेत पांच लोग बीमार, उल्टी-दस्त के बाद अस्पताल में भर्ती

सहरसा जिले में भैंस के कच्चे दूध से बनी छांकी पीने के बाद 4 बच्चों और एक व्यक्ति की तबीयत अचानक बिगड़ गई. सभी को उल्टी, दस्त और बुखार होने पर आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के बाद उनकी स्थिति सामान्य बताई जा रही है.

सहरसा जिले के बनमा ईटहरी थाना क्षेत्र के रसलपुर पंचायत स्थित मुरली बोरवा वार्ड संख्या-1 में सोमवार को भैंस के दूध से बनी छांकी पीने के बाद चार बच्चों समेत पांच लोगों की अचानक तबीयत बिगड़ गयी. सभी को उल्टी, दस्त और अन्य स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर परिजनों ने तत्काल सोनवर्षा पीएचसी पहुंचाया. प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने बेहतर इलाज के लिए सभी को सहरसा रेफर कर दिया. उपचार के बाद सभी की स्थिति में सुधार बताया जा रहा है.

छांकी पीने के बाद अचानक बिगड़ी तबीयत

परिजनों के अनुसार गांव में वर्षों से एक परंपरा चली आ रही है. भैंस के नए कच्चे दूध से तैयार छांकी सबसे पहले कुलदेवी को अर्पित की जाती है. इसके बाद इसे प्रसाद के रूप में लोगों के बीच वितरित किया जाता है. सोमवार को भी इसी परंपरा के तहत छांकी तैयार कर कुलदेवी को चढ़ायी गयी और बाद में ग्रामीणों के बीच प्रसाद के रूप में बांटी गयी.

छांकी पीने के कुछ ही देर बाद दिव्यांशु कुमार (6), दिव्यांश (3), जिज्ञांश (7), आरव (8 माह) और रणवीर यादव (32) की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी.

उल्टी-दस्त के साथ बच्चों को आया बुखार

बताया गया कि सभी को अचानक उल्टी और दस्त की शिकायत शुरू हो गयी. कुछ बच्चों को उल्टी-दस्त के साथ बुखार भी आने लगा. एक साथ कई लोगों की तबीयत बिगड़ने से परिजन चिंतित हो गये. इसके बाद सभी को तत्काल सोनवर्षा पीएचसी ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार शुरू किया.

बेहतर इलाज के लिए सहरसा किया गया रेफर

पीएचसी में प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने सभी मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा के लिए सहरसा रेफर कर दिया. परिजनों ने मरीजों को सहरसा पहुंचाया, जहां चिकित्सकों की निगरानी में इलाज किया गया. उपचार के बाद सभी मरीजों की हालत में सुधार हुआ और अस्पताल में इलाजरत सभी लोगों को अब सामान्य बताया जा रहा है.

परिजनों ने जतायी बाहरी पदार्थ गिरने की आशंका

परिजनों ने आशंका जतायी कि प्रसाद के रूप में ग्रहण की गयी छांकी में संभवतः कोई बाहरी पदार्थ गिर गया होगा, जिससे इसे खाने के बाद लोगों की तबीयत बिगड़ी. हालांकि इस संबंध में किसी निश्चित कारण की पुष्टि नहीं हुई है.

ग्रामीण बोले, वर्षों पुरानी है परंपरा

ग्रामीणों का कहना है कि छांकी बनाने और कुलदेवी को अर्पित कर प्रसाद के रूप में वितरित करने की परंपरा वर्षों पुरानी है. इससे पहले कभी इस तरह की घटना सामने नहीं आयी थी. फिलहाल चिकित्सकीय उपचार के बाद सभी मरीजों की स्थिति सामान्य होने से परिजनों ने राहत की सांस ली है.

अस्पताल में इलाजरत बच्चे. | Prabhat Khabar Network


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लेखक के बारे में

By अंजन आर्यन सिंह

पत्रकारिता में 14 वर्षों का अनुभव. अब तक लगातार सहरसा से क्राइम और स्वास्थ्य की खबरें संकलित करता हूं.

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