सहरसा. समाहरणालय सभागार में जिलाधिकारी दीपेश कुमार की अध्यक्षता में उद्योग विभाग द्वारा संचालित विभिन्न स्वरोजगार एवं उद्यम प्रोत्साहन योजनाओं की समीक्षा बैठक आयोजित की गई. इसमें मुख्य रूप से प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) और प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) की प्रगति की समीक्षा की गई.
लक्ष्य के मुकाबले ऋण वितरण की स्थिति
बैठक में जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक मुकेश कुमार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के आंकड़े प्रस्तुत किए:
- पीएमईजीपी योजना: जिले को प्राप्त कुल लक्ष्य 69 के विरुद्ध 70 ऋण स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से अब तक केवल 35 मामलों में ही ऋण का वितरण हो सका है.
- पीएमएफएमई योजना: निर्धारित लक्ष्य 157 के विरुद्ध 135 ऋण स्वीकृत हुए हैं, जिनमें से 96 मामलों में ही राशि का भुगतान किया गया है.
कम प्रगति पर डीएम ने जताया असंतोष
ऋण वितरण की धीमी रफ्तार पर जिलाधिकारी दीपेश कुमार ने सख्त असंतोष व्यक्त किया. उन्होंने सभी बैंकों को निर्देशित किया कि स्वीकृत हो चुके मामलों का नियमानुसार जल्द से जल्द निष्पादन करें. डीएम ने कहा कि जिले में एग्रो बेस्ड (कृषि आधारित) और फूड प्रोसेसिंग (खाद्य प्रसंस्करण) लघु उद्योगों की अपार संभावनाएं हैं. सभी बैंक इस जनकल्याणकारी योजना को गंभीरता से लें और आवेदनों का समयबद्ध निपटारा करें.
बिना ठोस कारण आवेदन रद्द करने पर चेतावनी
बैठक में मौजूद उप विकास आयुक्त (DDC) गौरव कुमार ने भी बैंकों को ऋण स्वीकृति और भुगतान की प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश दिया. उन्होंने बैंकों को स्पष्ट चेतावनी दी कि बिना किसी ठोस और तकनीकी कारण के आवेदनों को अस्वीकृत (रिजेक्ट) करने से बचें.
सितंबर 2026 तक बढ़ी योजना की अवधि
महाप्रबंधक ने जानकारी दी कि पीएमएफएमई योजना की अवधि को बढ़ाकर अब सितंबर 2026 तक कर दिया गया है. इससे लंबित आवेदनों का निष्पादन कर शत-प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त करने में मदद मिलेगी. इसके अलावा जब तक नए वित्तीय वर्ष का लक्ष्य प्राप्त नहीं होता, तब तक पूर्व निर्धारित लक्ष्य को ही चालू वर्ष का लक्ष्य मानकर काम जारी रहेगा. डीएम ने बैंकों को इसके अनुरूप हर महीने ऋण स्वीकृति और वितरण सुनिश्चित करने को कहा. इस बैठक में उप विकास आयुक्त, महाप्रबंधक जिला उद्योग केंद्र, अग्रणी बैंक जिला प्रबंधक (LDM) सहित विभिन्न बैंकों के वरिष्ठ प्रतिनिधि उपस्थित थे.
