सत्तरकटैया में जलभराव से परेशान किसानों का बड़ा कदम: DM को सौंपा 200 किसानों के हस्ताक्षर वाला ज्ञापन

सहरसा जिले के सत्तरकटैया प्रखंड में जलजमाव से त्रस्त किसानों ने जिला प्रशासन से गुहार लगाई है. धेमरा नदी के पानी की निकासी बाधित होने से खरीफ और रबी दोनों फसलों को भारी नुकसान हो रहा है. किसानों की मांग है कि 'सतरस फाटक' को सितंबर माह तक खुला रखा जाए.

सहरसा जिले के सत्तरकटैया प्रखंड अंतर्गत बारा पंचायत में जलजमाव की विकट समस्या से जूझ रहे सैकड़ों किसानों ने शुक्रवार को एकजुट होकर जिला प्रशासन का दरवाजा खटखटाया. स्थानीय ग्रामीणों और किसानों ने जिलाधिकारी (DM) को 200 लोगों के हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन सौंपकर 'सतरस फाटक' को सितंबर महीने तक पूरी तरह से खुला रखने की मांग की है, ताकि क्षेत्र के खेतों से पानी की निकासी सुचारु रूप से हो सके.

समय से पहले फाटक बंद करने से बनता है बाढ़ का खतरा

ज्ञापन सौंपने पहुंचे किसानों ने अपनी समस्या बताते हुए कहा:

  • धेमरा नदी का बहाव प्रभावित: धेमरा नदी का पानी सतरस फाटक के रास्ते आगे बढ़कर कोपरिया में कोसी नदी से मिलता है.
  • कृत्रिम जलजमाव: हर साल सिंचाई या अन्य कारणों से सतरस फाटक को समय से पहले ही बंद कर दिया जाता है, जिससे नदी का पानी आगे नहीं निकल पाता और बारा पंचायत के कई गांवों में जलभराव व बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो जाती है.
  • खेती पर दोहरी मार: जलजमाव के कारण एक तरफ जहां खरीफ की फसल पूरी तरह सड़कर बर्बाद हो जाती है, वहीं दूसरी तरफ जल निकासी न होने से रबी फसल की समय पर बुआई संभव नहीं हो पाती. इस तरह किसानों को हर साल दोहरी आर्थिक चपत लगती है.

सितंबर तक फाटक खुले रखने की पुरजोर मांग

किसानों ने जिला प्रशासन से स्पष्ट मांग की है कि मानसून के मौसम में कम से कम सितंबर माह के अंत तक सतरस के सभी फाटकों को खुला रखा जाए. इससे वर्षा का अतिरिक्त पानी आसानी से कोसी नदी में बह जाएगा और हजारों एकड़ कृषि योग्य भूमि जलमग्न होने से बच जाएगी.

"यह हजारों किसानों की आजीविका का सवाल": टिंकू मैथिल

इस मौके पर मौजूद युवा समाजसेवी टिंकू मैथिल ने कहा:

युवा समाजसेवी का वक्तव्य: "यह ज्ञापन केवल कुछ लोगों की मांग नहीं, बल्कि सत्तरकटैया के पूरे किसान समुदाय की सामूहिक पुकार है. करीब 200 किसानों ने अपने हस्ताक्षर कर जिलाधिकारी से गुहार लगाई है. जिला प्रशासन को इस गंभीर मुद्दे का संज्ञान लेते हुए तुरंत आदेश जारी करना चाहिए ताकि हजारों किसानों की फसल और आजीविका सुरक्षित रह सके."

किसानों ने उम्मीद जताई है कि जिला प्रशासन उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगा और क्षेत्र में जलनिकासी की समस्या का कोई स्थायी और व्यावहारिक समाधान निकालेगा.


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By Vinay Kumar Mishra

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