शिक्षकों को न्याय दिलाने में हस्तक्षेप की मांग

शिक्षकों को न्याय दिलाने में हस्तक्षेप की मांग

टीईटी अनिवार्यता को लेकर जिला प्राथमिक शिक्षक संघ ने प्रधानमंत्री को भेजा पत्र सहरसा. जिला प्राथमिक शिक्षक संघ प्रधान सचिव नूनूमणि सिंह, अध्यक्ष किशोरी साह ने उच्चतम न्यायालय द्वारा एक सितंबर को दिये निर्णय के आलोक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र प्रेषित किया है. दिये पत्र में उन्होंने कहा कि जिला शाखा सदस्य सर्वोच्च न्यायालय के पिछले एक सितंबर के फैसले की ओर ध्यान आकृष्ट करना चाहता है. जिससे सेवा में बने रहने व पदोन्नति पाने के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा को अनिवार्य बनाया गया है. उन्होंने कहा कि सेवारत शिक्षक को भी सेवा में बने रहने के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना आवश्यक होगा. जिन शिक्षकों की सेवा अवधि पांच वर्ष से अधिक बची है, उन्होंने भी सेवा में बने रहने के लिए दो वर्ष के अंदर टीईटी उत्तीर्ण करना आवश्यक होगा. उत्तीर्ण नहीं होने की स्थिति में हटाने या अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जा सकती है. उन्होंने फैसले पर अपनी गहरी पीड़ा व्यक्त करते कहा कि अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ इसे संवैधानिक व प्राकृतिक न्यायिक के सिद्धांत के विपरीत मानता है. इससे ना केवल सेवारत शिक्षकों का मनोबल गिरेगा. बल्कि शिक्षक प्रणाली एवं शिक्षा की गुणवत्ता पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा. उन्होंने कहा कि टीईटी केवल योग्यता के आधार पर शिक्षक बनने के लिए मात्र एवं पात्रता परीक्षा है. इसे लागू करने से पहले ही सेवा में शामिल हो चुके शिक्षकों के लिए इसे अनिवार्य बनाना अन्याय पूर्ण होगा. उन्होंने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया कि भारत के विद्यालय शिक्षकों को न्याय दिलाने के लिए इस मामले में हस्तक्षेप करें.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Dipankar Shriwastaw

Dipankar Shriwastaw is a contributor at Prabhat Khabar.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >