थाना चौक स्थित दुर्गा मंदिर में उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़

थाना चौक स्थित दुर्गा मंदिर में उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़

मां दुर्गा सहित अन्य देवताओं की प्रतिमा रहती है आकर्षण का केंद्र चार दशकों से थाना चौक पर हो रही है मां की अराधना सहरसा . शहर के थाना चौक पर सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति द्वारा वर्ष 1985 से मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर पूजा की जाती है. शहर के बीचोंबीच बने शक्ति की देवी मां दुर्गा के मंदिर में श्रद्धालुओं की सबसे ज्यादा भीड़ उमड़ती है. सदर थाना गेट के सामने वर्ष 1985 में सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश लाल व गोपाल जी द्वारा मां दुर्गा पूजा की परंपरा शुरू की गयी. जो लगातार चार दशकों से अधिक समय से जारी है. शुरुआती कुछ वर्षों तक झोपड़ीनुमा मंदिर में पूजा होने के बाद 90 के दशक में छतदार मंदिर की स्थापना हुई. जिसका धीरे-धीरे विस्तार होता गया. वर्ष 90 के दशक में तत्कालीन थानाध्यक्ष एनपी सिंह व पूजा समिति द्वारा मंदिर स्थापना में काफी अहम भूमिका निभाई गयी. अब तो थाना चौक का दुर्गा मंदिर भक्तों की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है. ना सिर्फ मां दुर्गा की मूर्ति बल्कि अन्य देवी-देवताओं की भव्य मिट्टी की मूर्ति सबसे बड़े आकर्षण का केंद्र होती है. इसके अलावे मंदिर के बाहरी भाग में बांस से बना विशालकाय पंडाल भी मंदिर को भव्यता प्रदान करता है. मंदिर का पट खुलते ही मां के दर्शन एवं महिलाओं द्वारा खोईंछा भरने के साथ ही प्रसाद चढ़ाने के लिए काफी भीड़ जमा होती है. लगभग साढ़े तीन दशकों से यहां बंगाल व अन्य जगहों के कलाकारों द्वारा मिट्टी की मूर्ति स्थापित कर पूजा होती है. नवरात्रि के मौके के अलावा भी थाना चौक दुर्गा मंदिर में आम दिनों में भी श्रद्धालु पूजा करने आते हैं. सार्वजनिक दुर्गा मंदिर समिति द्वारा आयोजित किये जाने वाले दुर्गा पूजा के दौरान थाना चौक स्थित दुर्गा मंदिर में सबसे ज्यादा भीड़ जमा होती है. थाना चौक की पहचान भी दुर्गा मंदिर से ही होती है. बीच बाजार में होने के कारण यहां सबसे ज्यादा लोगों की भीड़ होती है. यहां लगने वाला मेला भव्यता को काफी बढ़ा देता है. थाना चौक सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति द्वारा तैयार किये जाने वाला विशालकाय पंडाल पूजा एवं मेला का सबसे बड़ा आकर्षण का केंद्र बना रहता है. इस बार भी मेला एवं पूजा आयोजन की तैयारी जोरो पर है. मां के मिट्टी की मूर्ति का निर्माण तेजी से हो रहा है. आगे स्थायी रूप से संगमरमर की प्रतिमा स्थापित करने की भी योजना है.

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By Dipankar Shriwastaw

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