सहरसा में अब कचरे का होगा वैज्ञानिक प्रबंधन, 50 टन एमआरएफ और 70.5 टन क्षमता का कंपोस्टिंग प्लांट बनेगा

सहरसा नगर निगम ने शहर के बढ़ते ठोस कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए एक नई पहल शुरू की है. नगर आयुक्त प्रभात कुमार झा की उपस्थिति में मेटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) और विंडो कंपोस्टिंग प्लांट की स्थापना के लिए अनुबंध किया गया है.

सहरसा शहर में बढ़ते ठोस कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन और उसके बेहतर उपयोग की दिशा में नगर निगम ने महत्वपूर्ण पहल की है. नगर निगम कार्यालय में नगर आयुक्त प्रभात कुमार झा की उपस्थिति में मेटेरियल रिकवरी फैसिलिटी यानी एमआरएफ और विंडो कंपोस्टिंग प्लांट की स्थापना के लिए चयनित एजेंसी मेसर्स नंदनी वेस्ट मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड के साथ अनुबंध किया गया. परियोजना के तहत 50 टन प्रतिदिन क्षमता वाले एमआरएफ और 70.5 टन प्रतिदिन क्षमता वाले विंडो कंपोस्टिंग प्लांट की स्थापना की जायेगी.

नगर निगम ने दोनों संयंत्रों को निर्धारित छह माह की अवधि में पूरा कर क्रियाशील करने का लक्ष्य रखा है. इनके शुरू होने के बाद शहर से निकलने वाले सूखे और जैविक कचरे के वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण की व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है.

सूखे कचरे से अलग होगी रिसाइकिल होने वाली सामग्री

50 टन प्रतिदिन क्षमता वाले एमआरएफ में शहर से एकत्रित सूखे कचरे को वैज्ञानिक तरीके से अलग-अलग किया जायेगा. इसमें कागज, प्लास्टिक, धातु सहित अन्य पुनर्चक्रण योग्य सामग्रियों को अलग कर दोबारा उपयोग में लाने की प्रक्रिया को बढ़ावा दिया जायेगा.

इससे एक ओर रिसाइकिल होने वाले कचरे का उपयोग बढ़ेगा, वहीं दूसरी ओर अंतिम निस्तारण के लिए भेजे जाने वाले अपशिष्ट की मात्रा भी कम करने में मदद मिलेगी.

जैविक कचरे से तैयार होगी कंपोस्ट

परियोजना के तहत 70.5 टन प्रतिदिन क्षमता वाले विंडो कंपोस्टिंग प्लांट की भी स्थापना की जायेगी. इसमें घरों, सब्जी मंडियों और अन्य स्थानों से निकलने वाले जैविक कचरे का वैज्ञानिक पद्धति से प्रसंस्करण किया जायेगा. इससे जैविक अपशिष्ट से कंपोस्ट तैयार करने की व्यवस्था विकसित होगी.

नगर निगम के अनुसार इस व्यवस्था के प्रभावी संचालन से शहर में कचरे के अनियंत्रित संचयन और निस्तारण पर रोक लगाने में मदद मिलेगी. साथ ही कचरे को संसाधन के रूप में उपयोग करने का आधार भी तैयार होगा.

छह माह में दोनों संयंत्रों को चालू करने का लक्ष्य

नगर निगम ने परियोजना को निर्धारित छह माह की अवधि में पूरा कर दोनों संयंत्रों को क्रियाशील करने का लक्ष्य रखा है. इसके चालू होने के बाद प्रतिदिन उत्पन्न होने वाले कचरे के एक बड़े हिस्से का वैज्ञानिक प्रसंस्करण संभव हो सकेगा.

कचरे के पृथक्करण, पुनर्चक्रण और जैविक अपशिष्ट के प्रसंस्करण की व्यवस्था मजबूत होने से शहर की स्वच्छता व्यवस्था को भी तकनीकी आधार मिलने की उम्मीद है.

स्वच्छता व्यवस्था को मिलेगी तकनीकी मजबूती

नगर निगम की इस पहल से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की मौजूदा व्यवस्था को वैज्ञानिक और तकनीकी मजबूती मिलने की उम्मीद है. परियोजना के क्रियाशील होने के बाद कचरे के निस्तारण के साथ उसके उपयोग पर भी जोर रहेगा. इससे स्वच्छ, व्यवस्थित और पर्यावरण अनुकूल शहर बनाने की दिशा में नगर निगम के प्रयासों को मजबूती मिल सकती है.

अनुबंध संपन्न होने के अवसर पर स्वच्छता पदाधिकारी देवेंद्र प्रसाद सहित नगर निगम के संबंधित पदाधिकारी और कर्मी मौजूद थे.

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By Vinay Kumar Mishra

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