सहरसा. समाहरणालय स्थित कार्यालय प्रकोष्ठ में सोमवार को जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन नियमावली-2016 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर जिला स्तरीय अनुश्रवण समिति की बैठक आयोजित की गई. बैठक की अध्यक्षता जिलाधिकारी दीपेश कुमार ने की. इस दौरान जिले के सरकारी एवं निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम, पैथोलॉजी प्रयोगशालाओं और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में जैव चिकित्सा अपशिष्ट के सुरक्षित प्रबंधन की विस्तृत समीक्षा की गयी.
सभी अस्पतालों को नियमों का पालन करने का निर्देश
बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने सभी स्वास्थ्य संस्थानों को जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन नियमावली-2016 का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि प्रत्येक संस्थान में रंग-कोड आधारित अपशिष्ट पृथक्करण प्रणाली का प्रभावी तरीके से पालन किया जाये.
अधिकृत एजेंसी से ही होगा अपशिष्ट का निस्तारण
डीएम ने निर्देश दिया कि जैव चिकित्सा अपशिष्ट का संग्रहण, परिवहन और निस्तारण केवल अधिकृत एजेंसी के माध्यम से निर्धारित समयसीमा के भीतर कराया जाए. उन्होंने कहा कि इससे संक्रमण फैलने की आशंका कम होगी और पर्यावरण संरक्षण भी सुनिश्चित किया जा सकेगा.
नियमित निरीक्षण और सख्त कार्रवाई के निर्देश
जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को सभी स्वास्थ्य संस्थानों का नियमित निरीक्षण और अनुश्रवण करने का निर्देश दिया. उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि किसी भी संस्थान में नियमों के पालन में लापरवाही या अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित संस्थान के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जायेगी.
जनस्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण पर दिया जोर
डीएम दीपेश कुमार ने कहा कि जैव चिकित्सा अपशिष्ट का वैज्ञानिक और सुरक्षित प्रबंधन जनस्वास्थ्य तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए अत्यंत आवश्यक है. उन्होंने सभी विभागों और स्वास्थ्य संस्थानों से आपसी समन्वय के साथ निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित करने की अपील की.बैठक में सिविल सर्जन, अपर समाहर्ता, जिला प्रदूषण नियंत्रण पदाधिकारी, विभिन्न सरकारी एवं निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम, पैथोलॉजी प्रयोगशालाओं तथा अन्य स्वास्थ्य संस्थानों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे.
