सहरसा का बाबा मटेश्वर धाम: जहां स्वयंभू शिवलिंग के दर्शन मात्र से पूरी होती है हर मनोकामना

सहरसा जिले का बाबा मटेश्वर धाम शिवभक्तों के लिए श्रद्धा का प्रमुख केंद्र है. मान्यता है कि यहां स्थित स्वयंभू शिवलिंग के दर्शन मात्र से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं. यह धाम अब एक महत्वपूर्ण धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में उभर रहा है.

सहरसा जिले के सिमरी बख्तियारपुर प्रखंड अंतर्गत काठो गांव में स्थित बाबा मटेश्वर धाम महादेव मंदिर श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. यह मंदिर वर्षों से उत्तर बिहार के शिवभक्तों की श्रद्धा और अटूट विश्वास का प्रतीक है. मान्यता है कि स्वयंभू स्वरूप में प्रकट हुए बाबा मटेश्वरनाथ के दरबार में सच्चे मन से पूजा-अर्चना करने वाले किसी भी भक्त की झोली खाली नहीं रहती.

स्वयंभू शिवलिंग और धार्मिक महत्व

काठो स्थित बाबा मटेश्वर महादेव मंदिर धार्मिक एवं आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है:

  • स्वयंभू स्वरूप: ग्रामीणों और आचार्यों के अनुसार मंदिर में स्थापित शिवलिंग स्वयंभू (प्रकृति से स्वयं प्रकट) है. प्राचीन काल से ही यहाँ निरंतर पूजा-अर्चना का क्रम चला आ रहा है.
  • अलौकिक शांति: मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं को एक अद्भुत शांति और सकारात्मक ऊर्जा की अनुभूति होती है. सुबह की मंगला आरती से लेकर रात्रि श्रृंगार आरती तक यहाँ भक्तों का आना-जाना लगा रहता है.

सावन और महाशिवरात्रि पर दिखता है भक्ति का अद्भुत नजारा

महाशिवरात्रि और पवित्र सावन मास के दौरान बाबा मटेश्वर धाम में श्रद्धालुओं का भारी जनसैलाब उमड़ता है:

  • गंगाजल से जलाभिषेक: सावन महीने में श्रद्धालु मुंगेर जिले के छर्रापट्टी घाट से पवित्र गंगाजल उठाकर पैदल यात्रा करते हुए बाबा का जलाभिषेक करने पहुँचते हैं. यह सिलसिला पूरे सावन मास अनवरत जारी रहता है.
  • सांस्कृतिक महोत्सव: महाशिवरात्रि के अवसर पर राज्य सरकार के कला-संस्कृति विभाग की ओर से दो दिवसीय भव्य राज्यस्तरीय सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है.
  • वैदिक पूजन व श्रृंगार: पर्व-त्योहारों के दौरान मंदिर को भव्यता से सजाया जाता है. विशेष वैदिक मंत्रोच्चार के बीच बाबा का भव्य श्रृंगार, रुद्राभिषेक और महाआरती की जाती है.

धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में उभर रहा मटेश्वर धाम

स्थानीय निवासियों का कहना है कि बाबा मटेश्वर धाम अब न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि सहरसा जिले में एक प्रमुख धार्मिक पर्यटन (Religious Tourism) स्थल के रूप में भी तेजी से अपनी पहचान बना रहा है. मंदिर परिसर में लगातार हो रहे सौंदर्यीकरण और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से दूर-दराज के जिलों से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में हर साल रिकॉर्ड बढ़ोतरी हो रही है.


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