काशी के मंच पर चमका सहरसा का 18 वर्षीय लाल: काशी कुंभ 2026 में अर्पित रंजन को मिला 'सर्वश्रेष्ठ युवा साहित्यकार' सम्मान

सहरसा के 18 वर्षीय अर्पित रंजन को 'काशी कुंभ 2026' में 'सर्वश्रेष्ठ युवा साहित्यकार' सम्मान मिला. उनकी 'अर्पण' व 'आकांक्षी' किताबें युवाओं के जीवन संघर्ष पर आधारित हैं.

साहित्य, कला और सनातन संस्कृति की अविनाशी नगरी काशी (वाराणसी) में आयोजित 'काशी कुंभ 2026' के राष्ट्रीय महामंच पर सहरसा के 18 वर्षीय युवा लेखक अर्पित रंजन ने अपनी प्रतिभा का परचम लहराया है.

मातृभाषा हिंदी संगठन द्वारा वाराणसी के लमही स्थित होटल इंदु पैलेस में आयोजित भव्य राष्ट्रीय समागम में अर्पित रंजन को 'काशी गौरव सम्मान 2026' के अंतर्गत 'सर्वश्रेष्ठ युवा साहित्यकार' के प्रतिष्ठित पुरस्कार से नवाजा गया. राष्ट्रीय स्तर के इस सम्मान से न केवल सहरसा बल्कि पूरे बिहार के साहित्यिक गलियारों में हर्ष और गर्व का माहौल है.

पूर्व केंद्रीय मंत्री और काशी विश्वनाथ के मुख्य अर्चक ने संयुक्त रूप से किया सम्मानित

समारोह के द्वितीय सत्र में आयोजित सम्मान समारोह के दौरान भारत सरकार के पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री अश्विनी कुमार चौबे और श्री काशी विश्वनाथ मंदिर गद्दी के मुख्य अर्चक आचार्य श्रीकांत मिश्रा ने संयुक्त रूप से अर्पित रंजन को अंगवस्त्र, स्मृति चिह्न और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया.

इस गरिमामयी अवसर पर भारत सरकार के पूर्व भारी उद्योग मंत्री डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय और उत्तर प्रदेश विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष डॉ. कवीन्द्र नारायण श्रीवास्तव भी विशिष्ट अतिथि के रूप में मंच पर उपस्थित रहे.

12वीं के छात्र की लेखनी का कमाल: 'अर्पण' और 'आकांक्षी' पुस्तकों से बनाई पहचान

वर्तमान में 12वीं कक्षा में अध्ययनरत अर्पित रंजन ने बेहद अल्पायु में ही अपनी सशक्त और संवेदनशील लेखनी के दम पर हिंदी साहित्य जगत में विशिष्ट पहचान दर्ज कराई है. वे चर्चित पुस्तक 'अर्पण' और 'आकांक्षी' के लेखक हैं.

उनकी रचनाओं का मुख्य केंद्र बिंदु युवा पीढ़ी के अंतर्द्वंद्व, जीवन-संघर्ष, उच्च मानवीय मूल्य और ज्वलंत सामाजिक सरोकार हैं. आयोजन समिति के अनुसार, इतनी कम उम्र में समाज के प्रति गहरी जिम्मेदारी और सकारात्मक चेतना जगाने वाली उत्कृष्ट रचनाधर्मिता को देखते हुए अर्पित का चयन राष्ट्रीय स्तर के इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए सर्वसम्मति से किया गया.

'कम उम्र में समाज को दिशा देना अद्भुत': अश्विनी चौबे और आचार्यों ने दी शुभकामनाएं

सम्मान प्रदान करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने कहा कि जिस उम्र में युवा आमतौर पर दिशाहीनता के शिकार होते हैं, उस उम्र में अर्पित देश और समाज को सही दिशा दिखाने वाले गंभीर विषयों पर कालजयी साहित्य का सृजन कर रहे हैं, जो समूचे राष्ट्र के लिए अनुकरणीय है.

वहीं काशी विश्वनाथ गद्दी के मुख्य अर्चक आचार्य श्रीकांत मिश्रा ने वैदिक मंगलाचरण के साथ अर्पित के उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद दिया. समारोह में अमरीश सिंह भोला, डॉ. राजीव श्री गुरु जी और चक्रपाणि ज्ञानपुरी सहित देश भर से जुटे शीर्ष विद्वानों और राजनेताओं ने भी अर्पित की लेखनी की मुक्तकंठ से सराहना की.

सहरसा से काशी तक गूंजी धमक: 'साहित्य से समाज, समाज से राष्ट्र' की मिसाल बने अर्पित

'काशी कुंभ 2026' का मुख्य ध्येय वाक्य 'साहित्य से समाज, समाज से राष्ट्र' रखा गया था, जिसे अर्पित रंजन की वैचारिक दृष्टि पूरी तरह चरितार्थ करती है.

गृह जिले सहरसा में इस सम्मान की खबर मिलते ही साहित्यकारों, शिक्षकों, समाजसेवियों और परिजनों में खुशी की लहर दौड़ गई. लोगों का कहना है कि अर्पित की यह ऐतिहासिक उपलब्धि कोसी और सीमांचल की युवा पीढ़ी को साहित्य, कला और रचनात्मक लेखन की ओर प्रेरित करने में मील का पत्थर साबित होगी.

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Vinay Kumar Mishra

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >