सहरसा सदर अस्पताल में मरीजों का इलाज मुश्किल होता जा रहा है. उसमें भी यदि मरीज गंभीर हो, या अॉपरेशन हुआ हो, तो स्थिति अौर भी विकट हो जाती है. यहां का ब्लड बैंक कभी भी धोखा दे सकता है. ऐसे में अपने लोगों के भरोसे ही रहना पड़ता है.
सहरसा : सदर अस्पताल परिसर स्थित लोगों की सुविधा के लिए संचालित ब्लड बैंक सुविधा देने के बजाय सिर दर्द बनता जा रहा है. कभी फ्रिज खराब होने तो कभी ब्लड बैग नहीं होने की जानकारी से मरीज व उसके परिजन परेशान हैं. कुछ दिन पूर्व ब्लड बैंक का फ्रिज खराब था. मरीज के परिजनों को सुपौल सहित अन्य जगहों से आवश्यकता पड़ने पर ब्लड लाना पड़ता था. उपाधीक्षक व अस्पताल प्रबंधक ने फ्रिज को दुरुस्त करवा मरीजों की परेशानी को दूर करने का प्रयास किया था. वर्तमान में कई महीनों से ब्लड बैंक में बैग समाप्त है. जिसके कारण मरीज व उसके परिजनों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है. खासकर रात के समय आवश्यकता पड़ने पर लोगों को बाजार का चक्कर लगाना पड़ता है. परिजनों को बाजार से औने-पौने कीमत पर बैग खरीदना मजबूरी बन गयी है.
कहां मिलता है बैग
ब्लड बैंक कर्मियों द्वारा मरीजों को तो बाजार से ब्लड बैग खरीद कर लाने की बात कह अपने कर्तव्य का इतिश्री कर लेते हैं. लेकिन सबसे बड़ी बात है कि यह बैग बाजार में आखिर खुलेआम कैसे बिकता है. जबकि जानकारी के अनुसार बिहार एड्स कंट्रोल सोसायटी द्वारा सरकार द्वारा अनुज्ञप्ति प्राप्त रक्त अधिकोष को ही ब्लड बैग दिया जाता है. खुले बाजार में इसे बेचना अपराध है. बावजूद प्रशासन के नाक के नीचे खुलेआम बैग बेचा जा रहा है और लोग मजबूरी में कीमत से कई गुणा दाम में खरीदने के लिए विवश हैं. सूत्रों के अनुसार शहर के कई जगहों पर मेडिकल दुकान की आड़ में बैग बेचा जा रहा है.
फीस में अनियमितता
ब्लड बैंक में निजी नर्सिंग होम में भरती मरीज से वसूले जाने वाले प्रोसेसिंग शुल्क में काफी अनियमितता है. बैंक में तैनात कर्मी मरीजों से शुल्क लेने के बाद रसीद भी उपलब्ध नहीं कराते हैं. कुछ माह पूर्व अस्पताल उपाधीक्षक डॉ अनिल कुमार ने भी दो बार ब्लड बैंक का औचक निरीक्षण कर अनियमितता की पुष्टि कर सीएस को पत्र लिखा था. डीएस ने सीएस को पत्र लिखकर कहा था कि औचक निरीक्षण में मौजूद कर्मी द्वारा प्रोसेसिंग शुल्क से संबंधित कैश बुक रसीद सहित अन्य कागजात उपलब्ध नहीं कराया, जो अनियमितता का घोतक है. लेकिन सीएस द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गयी. कार्रवाई नहीं होने से ब्लड बैंक संचालक व कर्मियों का मनोबल बढ़ रहा है. सूत्रों के अनुसार यदि ब्लड बैंक के क्रियाकलापों की जांच वरीय अधिकारी अपने स्तर से करवायें तो कई अनियमितता सामने आ जायेगी. ब्लड बैंक कर्मी प्राइवेट मरीज से प्रोसेसिंग शुल्क वसूल कर व सांठ-गांठ से मरीज को अस्पताल में भरती दिखाकर वसूले गये शुल्क से अपनी जेब गरम करते हैं.
क्या कहते हैं अधिकारी
इस बाबत सिविल सर्जन डॉ अशोक कुमार सिंह ने कहा कि नार्को को बैग का आवंटन करना है. बैग समाप्ति को लेकर पत्र भी लिखा गया है. जल्द ही बैग उपलब्ध हो जायेगा. बाजार में बैग मिलने की जांच करवा दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जायेगी. जिन लोगों से प्रोसेसिंग शुल्क लिया जा रहा है, यदि रसीद नहीं दिया जा रहा है तो वह शिकायत करें, कार्रवाई की जायेगी.
