एसपी ने पूछा थानाध्यक्ष से स्पष्टीकरण, कर रहे हैं जवाब का इंतजार
सहरसा : बुधवार को सदर थाना में थानाध्यक्ष द्वारा पीड़ित सुशील भगत के साथ किये गये दुर्व्यहार की घटना के 48 घंटे बीत जाने के बाद भी प्रशासनिक महकमा मौन है. थानाध्यक्ष संजय कुमार सिंह के कारनामे का वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय स्तर व सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है. लोग इस मामले में कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं. सूबे में स्वच्छ व मित्र पुलिस बनाने की सरकारी कवायद पर भी प्रशासनिक उदासीनता बट्टा लगाने का काम कर रही है. जबकि वीडियो में पीड़ित को धक्का देकर थाना भवन से थानाध्यक्ष द्वारा बाहर निकाले जाने की पुष्टि जीवंत रुप में हो रही है. स्थानीय लोगों का कहना है कि अपराध करने पर कानून सभी के लिए बराबर है, फिर थानाध्यक्ष के सवाल पर भारतीय दंड संहिता बौनी क्यों लग रही है.
संशय में रहेंगे पीड़ित : स्थानीय निवासी राजकुमार बताते हैं कि सदर थाना को सरकार आदर्श थाना का दर्जा दे चुकी है. इसके बावजूद लोगों में थाना पहुंचने वाले फरियादी के लिए हमेशा भय का माहौल बना रहेगा. सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर हजारों लाइक्स व कमेंट देखने को मिल रहे है. खास बात यह है कि राष्ट्रीय ग्रुपों पर भी इसकी चर्चा खूब हो रही है.
कहां तो तय था…: आदर्श थाना में पहुंचने पर पीड़ित का स्वागत सबसे पहले मौजूद पुलिसकर्मियों को पेयजल के साथ करना था. जिसके बाद मदद के लिए बनाये गये काउंटर पर शिकायत सुननी थी. एनडीए एकमें सीएम नीतीश कुमार द्वारा पुलिस महकमा को दी गयी यह सीख उनके ही कार्यकाल में दम तोड़ चुकी है.
थाना में पीड़ित की फरियाद सुनने के बजाय धक्का देकर बाहर निकालने की प्रवृति सामने आ रही है. जबकि इस प्रकार के मामले में पुलिस को भी संवेदनशीलता दिखानी होगी. ताकि थाना में शिकायत लेकर पहुंचने वाले पीड़ित के अंदर विश्वास की बहाली की जा सके. शहर में हो रही चर्चा व राजनीतिक हस्तक्षेप को देख मामले की महत्ता बढ़ती ही जा रही है. स्थानीय खास से लेकर आमलोग तक न्याय का इंतजार कर रहे हैं.
