निकले थे साफ करने, गंदा करके चल दिये...

तीन दिनों का मिला था समय, 17 दिनों में भी नहीं हुई गांधी पथ के नालों की सफाई सहरसा : नगर परिषद के अकर्मण्यता की कहानी भी गजब है. एक तो यह कभी किसी काम को करता नहीं है. दूसरा जब दबाव पर करने निकलता है, तो उसे और भी ज्यादा बिगाड़ कर चला आता […]

तीन दिनों का मिला था समय, 17 दिनों में भी नहीं हुई गांधी पथ के नालों की सफाई

सहरसा : नगर परिषद के अकर्मण्यता की कहानी भी गजब है. एक तो यह कभी किसी काम को करता नहीं है. दूसरा जब दबाव पर करने निकलता है, तो उसे और भी ज्यादा बिगाड़ कर चला आता है. उदाहरण के लिए गांधी पथ की कहानी काफी है. बार-बार आवेदन-निवेदन के बाद भी गांधी पथ के नालों की सफाई के प्रति इसकी संवेदना नहीं जगी. धरना-प्रदर्शन, सड़क जाम के बाद वरीय अधिकारी की फटकार पर सफाई करने तो गये. जेसीबी, ट्रैक्टर, टीपर के साथ पहुंच जोर-शोर से काम भी शुरू किया. लेकिन साफ करने की बजाय नाला व सड़क को और भी गंदा कर दिया. व्यवसायी, राहगीर व स्थानीय निवासियों की परेशानी बरकरार ही रह गयी.
एसडीओ ने तीन दिनों का दिया था समय: जब बजबजाते नालों से गांधी पथ के लोग आजिज हो गये, तो बीते 14 जुलाई को दहलान चौक पर ही सड़क जाम कर धरना पर बैठ गये थे. सदर एसडीओ ने शिष्टमंडल से वार्ता की व नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी को बुलाकर तीन दिनों के अंदर गांधी पथ के नालों की सफाई कराने का आदेश दिया था. एसडीओ के आदेश पर नप के कार्यपालक पदाधिकारी दिनेश राम ने जाकर भौतिक दशा देखी और अगले दिन यानी 15 जुलाई से युद्ध स्तर पर सफाई कराने व नालों पर ढक्कन लगाने की बात कही. ससमय काम शुरू भी हुआ. लेकिन तीन दिनों में गांधी चौक से दहलान तक सड़क के उत्तरी नाले की ही सफाई की जा सकी. जबकि नप को मीर टोला, दहलान चौक से एबीएन हॉल, अनिरुद्ध गुप्ता के घर से एबीएन हॉल एवं मछली मार्केट से गांधी पथ तक की भी सफाई करना थी.
सड़क पर फैल रहा है काला गंदा पानी: चौथे दिन से इसी सड़क के दक्षिणी नाले की सफाई शुरू हुई. लोगों द्वारा अतिक्रमित नाले को मुक्त कराते सफाई की गयी. लेकिन आधे नाले के बाद अचानक काम बंद कर दिया. गांधी चौक के मुहाने तक सफाई नहीं हो पाने से इधर चार दिनों की मेहनत का कोई मायने नहीं रह गया. सड़कों पर ही नाले का काला व गंदा पानी फैल रहा है. इस रास्ते से राहगीरों का चलना मुश्किल हो गया है. दुकानदारी भी चौपट हो गयी है. लोगों ने कहा कि नप आधा-अधूरा काम करने की प्रवृति को त्याग जनहित में इसे शीघ्र पूरा करे. नालों पर शीघ्र ढक्कन लगाये, अन्यथा इस बार उग्र आंदोलन होगा.

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