नगर के लोग परेशान हैं नगर परिषद की व्यवस्था से
सहरसा : शहर में स्वच्छता अभियान का असर नहीं दिख रहा है. सफाई कर्मचारियों के अभाव में शहर की मुख्य सड़कों पर ही झाड़ू लगाया जाता है, जबकि कई गलियों में आज तक झाड़ू लगा ही नहीं है. नगर परिषद क्षेत्र के कई वार्डों की गलियां ऐसी हैं, जहां नगर पर्षद के सफाईकर्मी पहुंच ही नहीं पाते हैं. बरसात के इस मौसम में कई गलियों में कूड़े का ढेर रहने से स्थानीय लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है.
सुविधा नहीं बदली
वर्ष 1967 में सहरसा नगर पालिका का गठन होने के बाद से भले ही शहर की आबादी कई गुणा बढ़ गयी, लेकिन सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं बदला. सफाई कर्मचारियों की संख्या भी लगातार बढ़ते हुए तीन सौ के करीब पहुंच गयी. बहाली किये गये जमादार क्षेत्र में जाने के वजाय नप कार्यालय में ही मंडराते रहते है. पहले वार्ड कम थे अब संख्या 40 पर पहुंच गयी.
होल्डिंग टैक्स वसूली
शहर में रहने वाले अधिकतर लोगों से टैक्स की वसूली की जा रही है. सुविधा देने के नाम पर नगर परिषद गलियों की पीसीसी व नाले का निर्माण करा रही है. शहरी विकास मद के साथ ही अन्य योजनाओं से प्राप्त राशि से ही विकास कार्य हो रहा है. स्थानीय वार्ड पार्षदों द्वारा एनजीओं के माध्यम से सफाई का प्रस्ताव दिया गया था. लेकिन कोई कवायद नहीं हुई. नगर विकास विभाग को भेजे गये प्रस्ताव का कोई जवाब नहीं आने के कारण कार्यरत सफाईकर्मियों से शहर की सफाई का काम लिया जा रहा है. शहर की आबादी के 80 प्रतिशत घरों से टैक्स की वसूली की जाती है. सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं मिल पा रहा है.
संसाधन का उपयोग नहीं
शहर की सफाई को लेकर काफी संख्या में ट्रॉली व छोटे वाहन की खरीद की गयी थी, ताकि गलियों में पहुंच कर सफाई में सहयोग कर सके. खरीद होने के बाद भी संसाधन का उपयोग नहीं होने के कारण परेशानी हो रही है. शहर के बटराहा मोहल्ले में बीते तीन महीने से लोगों को ट्रॉली के दर्शन भी नहीं हुए हैं. इस अोर प्रशासन व जनप्रतिनिधियों को ध्यान देने की जरूरत है.
टैक्स देकर भी झेल रहे हैं सड़ांध
नहीं हुई सफाई, तो होगी कार्रवाई
नगर के सभी वार्डो व मुख्य सड़क पर सफाई कर्मी नियुक्त है. इसके बावजूद कही से कोई शिकायत मिलेगी तो कार्रवाई की जायेगी.
दिनेश राम, कार्यपालक पदाधिकारी, नगर परिषद सहरसा
