नहीं देते पक्की रसीद. आनाकानी करते हैं दुकानदार
पक्का बिल न होने पर ग्राहकों को सामान बदलने में भी परेशानी होती है. सरकार को भी राजस्व की क्षति होती है.
सहरसा नगर : देश की अर्थव्यवस्था को समृद्ध व ग्राहक को सुविधा देने के लिए केंद्र व राज्य सरकार द्वारा जन उपभोग की वस्तुओं पर विभिन्न प्रकार के टैक्स लिये जाते हैं.
इन करों की चोरी रोकने के लिए सामान की आवाजाही से लेकर खरीद-बिक्री में पक्के रसीद को अनिवार्य कर दिया गया है. खासकर मॉल्स, ब्रांडेड शो रूम, रेडिमेड स्टोर, ज्वेलरी शॉप, केमिस्ट शॉप पर पक्का रसीद अनिवार्य कर दिया गया था. महानगरों में ग्राहक भी जागरूक हैं व दुकानदार भी बिल पर ही सामान बेचते हैं. दूसरी तरफ छोटे शहरों व कसबाई इलाके में सरकार के दिशा निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा है. स्थानीय बाजार में सरकार द्वारा निर्धारित टैक्स की वसूली भी होती है, लेकिन ग्राहकों को तकनीकी समस्या बता दुकानदार कर चोरी कर मालामाल होता रहता है.
बड़े दुकानों पर ज्यादा गोलमाल : शहर में मॉल्स के अलावा दर्जनों ब्रांडेड स्टोर हैं. जिनमें खासकर होटल, रेस्टोरेंट, रेडिमेड गारमेंट, इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद, मोबाइल सहित ज्वेलरी की ज्यादातर दुकान शामिल है. इन काउंटरों पर ग्राहकों को सामान खरीदारी के वक्त प्रिंटर व इंटरनेट खराब रहने का बहाना बना कच्चा बिल दे दिया जाता है. इन बिलों पर निर्धारित सभी करों सहित कीमत का भुगतान पूर्व में ही ले लिया जाता है.
डिस्काउंट का मिलता है लालच: खरीदारी के वक्त टैक्स बचाने के लिए कई दुकानदार डिस्काउंट का ऑफर भी देते हैं. ग्राहक मिल रही खुली रियायत को फायदा समझ बिल लेने के बजाय उत्पाद लेकर ही संतोष कर लेते हैं. इसका खामियाजा ग्राहकों को प्रोडक्ट में शिकायत आने के बाद भुगतना पड़ता है. जब सर्विस सेंटर वारंटी देने से इनकार कर देता है.
ग्राहक में जागरूकता जरूरी: टैक्स चोरी रोकने के लिए सरकार के स्तर से विज्ञापन व कई माध्यमों से प्रचार-प्रसार किये जाते हैं. इसके बावजूद लोगों में जागरूकता की कमी है. ग्राहक खरीदारी के वक्त प्रोडक्ट की गुणवत्ता व बिलिंग को लेकर तत्पर रहेंगे तो उनके द्वारा की जा रही खरीदारी का लाभ सिर्फ दुकानदारों को मिलने के बजाय सरकार को भी होगा. समाजशास्त्री डॉ गणेश प्रसाद बताते हैं कि लोग लगातार नयी चीजों को खरीद रहे हैं. उनके द्वारा अदा किये गये टैक्स का पैसा ही देश के विकास करने में काम आता है.
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
आयकर विशेषज्ञ अधिवक्ता अनिल कुमार बताते हैं कि ग्राहकों को खरीदारी हमेशा पक्का बिल लेकर ही करनी चाहिए. पक्का रसीद ही उनके टैक्स को साबित करता है. उन्होंने बताया कि टैक्स के अलावा पक्का बिल वारंटी व उपभोक्ता हित में किये जाने वाले दावे में मददगार साबित होता है.
सेल के नाम पर टैक्स चोरी
शहर के बड़े-बड़े गारमेंट स्टोर द्वारा सेल लगा ग्राहकों को कम कीमत पर सामन देने की योजना टैक्स चोरी का बड़ा माध्यम बन रही है. इनलोगों द्वारा दुकान के उत्पादों को बगैर बिलिंग ग्राहकों को नकद लेकर दिया जाता है. सेल के नाम पर रोजाना लाखों का कारोबार होता है. इस वजह से सरकार के मापदंड से व्यवसायी बच जाते हैं.
