बगैर सिपाही चलता है थाना

कुव्यवस्था. 10 महीने से एससीएसटी थाना को नहीं मिले जवान एससीएसटी थाना में सिपाहियों का जत्था नहीं दिया गया है. इससे लोगों को परेशानी होती है. इतना ही नहीं ऐसे में मामलों के अभियुक्तों के साथ भी नरमी से ही पेश होना पड़ता है. इससे न्याय प्रक्रिया अौर लंबी होती जाती है. सहरसा नगर : […]

कुव्यवस्था. 10 महीने से एससीएसटी थाना को नहीं मिले जवान

एससीएसटी थाना में सिपाहियों का जत्था नहीं दिया गया है. इससे लोगों को परेशानी होती है. इतना ही नहीं ऐसे में मामलों के अभियुक्तों के साथ भी नरमी से ही पेश होना पड़ता है. इससे न्याय प्रक्रिया अौर लंबी होती जाती है.
सहरसा नगर : राज्य सरकार ने एससीएसटी समुदाय को सरल न्याय दिलाने के उद्देश्य से सभी जिला मुख्यालय में एससीएसटी थाना की स्थापना वर्ष 2012 में की थी. समाज के सबसे पिछड़े तबके को भी न्याय की उम्मीद जगी थी. आनन-फानन में डीबी रोड स्थित पुलिस पिकेट की जीर्णशीर्ण मकान में थाना का संचालन भी शुरू कर दिया गया.
शुरुआती समय में थाना में पहुंचने वाले पीड़ित लोगों को न्याय भी मिलने लगी. लेकिन बीते दस महीने से थाना में तैनात जवानों को तत्कालीन एसपी विनोद कुमार के निर्देश पर हटा लिया गया. फिलवक्त थाना में थानाध्यक्ष के अलावा दो जमादार ही कार्यरत है. थाना में पुलिसिया व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले जवानों की गैर मौजूदगी में कांड निष्पादन व गिरफ्तारी का आंकड़ा औंधे मुंह गिर चुका है. विभिन्न मामलों के नामजद अभियुक्त बेखौफ एससीएसटी कानून की धज्जी उड़ा रहे हैं. दूसरी तरफ पुलिस महकमा विगत दिन पहले शुरू हुए पंचायत चुनाव का बहाना कर पल्ला झाड़ रही है.
शून्य हो रही है गिरफ्तारी
थाना में नामजद अभियुक्तों की गिरफ्तारी के लिए थानाध्यक्ष को उनके घर पहुंच चिरौरी करनी पड़ती है. मान गये तो ठीक वरना बैरंग लौटना पड़ता है. इन दस महीनों में गिरफ्तारी का आंकड़ा शून्य तक पहुंच चुका है. पुलिस सामाजिक स्तर पर भी नामजदों को मनाने में लगी हुई है. पीड़ित भी पुलिस की लाचारी व कुव्यवस्था को देख चुप्पी साधे हुए है.
दर्जनों मामले है लंबित
अभियुक्तों की गिरफ्तारी व छापामारी नहीं होने की वजह से थाना में दर्जनों मामले धूल फांक रहे है. पीड़ित न्याय की आस में भटक रहे है. ज्ञात हो कि बगैर सुरक्षाकर्मी अभियुक्तों की गिरफ्तारी स्थानीय थाना के लिए सिरदर्द बनती जा रही है. ससमय अगर एससीएसटी थाना को सुरक्षा जवान उपलब्ध नहीं कराये गये तो लोगों का विश्वास कानून प्रक्रिया से उठने लगेगा.
नीचे से ऊपर तक है पता
जिला के पुलिस कप्तान से लेकर राज्य मुख्यालय तक को वस्तुस्थिति से अवगत कराया जा चुका है. इसके बावजूद कोई कवायद नहीं की गयी है. सोनवर्षाराज के बुधो सादा ने बताया कि चार महीने पहले गांव के एक दबंग व्यक्ति पर प्राथमिकी दर्ज करायी थी. लेकिन थानाध्यक्ष फोर्स की कमी बता पल्ला झाड़ लेते हैं.
जीर्ण भवन में चल रहा है थाना
पंचायत चुनाव के बाद थाना को मिलेगा बल
अभी जिले में पंचायत चुनाव चल रहा जिसमें जवानों की तैनाती की गयी है. चुनाव बाद एससीएसटी थाना को स्वीकृत बल उपलब्ध करा दी जायेगी.
अश्विनी कुमार, एसपी सहरसा

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