बंगाली बाजार में रोज के जाम से निजात के लिए रेल समपार पर अोवरब्रिज बनाने की मुहिम शुरू हुई. लेकिन जनप्रतिनिधियों व रेलवे की उदासीनता की वजह से यह अब तक शुरू नहीं हो पाया है. जबकि इसका कई बार उद्घाटन किया जा चुका है.
सहरसा मुख्यालय : बंगाली बाजार के रेल समपार पर बनने वाले ओवरब्रिज को पहली स्वीकृति 1997 में ही मिली थी. तब रेलमंत्री नीतीश कुमार थे और रेल राज्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने इस आरओबी का समारोह पूर्वक शिलान्यास किया था. इस बीच अलग-अलग सरकार में अलग-अलग रेल मंत्रियों द्वारा इसी ओवरब्रिज का दोबारा व तिबारा शिलान्यास भी हुआ.
लेकिन किसी सरकार या किसी मंत्री का प्रभाव यहां नहीं चल पाया. इन 19 वर्षों की अवधि में पांच सांसद संसद भवन पहुंचे. जिसमें राष्ट्रीय स्तर के कद्दावर व प्रभावशाली चेहरे तक शामिल हैं. लेकिन किसी सांसद की भी एक नहीं चली और यहां समस्या गहराती चली गयी. आश्चर्य तो यह भी है कि काम प्रारंभ नहीं हो पाने के कारणों का खुलासा भी आज तक नहीं हो सका.
दिनेश चंद्र से पप्पू यादव तक: 1997 में जब पहली बार बंगाली बाजार ओवरब्रिज का शिलान्यास हुआ था. तब सहरसा लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व दिनेश चंद्र यादव कर रहे थे. उन्हीं के प्रयास से इस आरओबी के प्रस्ताव को स्वीकृति मिली थी. 1998 में अनूप लाल यादव एमपी बने. लेकिन वे इस योजना की कभी कोई आवाज नहीं उठाये. 1999 में एक बार फिर दिनेश चंद्र यादव को यहां की जनता ने संसद भवन जाने का मौका दिया.
लेकिन इस बार भी बात आगे नहीं बढ़ पाई. 2004 में रंजीत रंजन को कोसी की प्रथम महिला सांसद होने का गौरव मिला. अगले ही साल 2005 में बड़ी रेल लाइन के उद्घाटन के साथ तत्कालीन रेलमंत्री लालू प्रसाद ने इस आरओबी का दूसरा शिलान्यास किया. लेकिन उससे आगे काम फिर नहीं बढ़ सका. 2009 में मधेपुरा लोकसभा क्षेत्र में शामिल होने के बाद देश के कद्दावर व राष्ट्रीय नेता शरद यादव के हाथों क्षेत्र का प्रतिनिधित्व गया. 2014 के लोकसभा चुनाव के आचार संहिता लागू होने से ठीक पहले शरद यादव के प्रयास से तत्कालीन रेल राज्यमंत्री अधीर रंजन चौधरी ने तीसरा शिलान्यास किया.
मिट्टी जांच के बाद एक बार फिर काम ठप हो गया. 2014 में सांसद बने पप्पू यादव से निर्माण कार्य शुरू कराने की आस लगाए लोग अब चौथे शिलान्यास के इंतजार में हैं.
काम शुरू नहीं हो पाने का कारण भी खंगाल नहीं पाये नेताजी
पहला शिलान्यास दिनेश तो तीसरा हुआ था शरद यादव के प्रयास से
रेलवे या एनएचएआइ : एजेंसी कौन
जिले के विकास की गति के लिए अतिआवश्यक बंगाली बाजार में ओवरब्रिज का निर्माण इस साल संसद में प्रस्तुत रेल बजट से ठीक पहले तक रेलवे को बनाना था. उसी क्रम में निरीक्षण के लिए आए डीआरएम से लेकर जीएम तक यही कहते रहे कि रेलवे इस मुद्दे पर गंभीर है. चूंकि इस आरओबी का निर्माण रेल व राज्य सरकार के फिफ्टी-फिफ्टी के शेयर से होना था. इसी आधार पर नक्शा भी बना. डीपीआर भी तैयार हुआ.
प्रथम चरण में मिट्टी जांच के लिए दस लाख रुपये भी दिए गए. मिट्टी जांच भी हुई. लेकिन उससे आगे काम नहीं हुआ. कार्य में अवरोध के लिए रेलवे राज्य सरकार पर ठिकरा फोड़ती रही. लेकिन पारित रेल बजट में इस योजना की चर्चा तक नहीं होने से यह एक बार फिर अधर में जाती दिखी.
लेकिन तब सूत्रों से जानकारी मिली कि रेलवे नहीं, एनएचएआइ इस आरओबी का निर्माण करायेगी. चर्चा तो यहां तक फैला दी गई थी कि अप्रैल में केंद्रीय पथ परिवहन सह राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी चौथे शिलान्यास को सहरसा आएंगे. लेकिन इस बात की पुष्टि एनएचएआइ के अधिकारी भी नहीं कर रहे हैं.
