पंचायत चुनाव: पहले चरण में ही जिला प्रशासन के व्यवस्था की निकली हवा

कोसी के दियारा क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था की होगी चुनौती सहरसा सदर : त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को निष्पक्ष व शांतिपूर्ण संपन्न कराने के जिला प्रशासन के सभी दावों की हवा पहले चरण के चुनाव में ही निकल गई. रविवार को जिले के पतरघट व सलखुआ प्रखंड के कुल 22 पंचायतों में संपन्न हुए चुनाव में […]

कोसी के दियारा क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था की होगी चुनौती

सहरसा सदर : त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को निष्पक्ष व शांतिपूर्ण संपन्न कराने के जिला प्रशासन के सभी दावों की हवा पहले चरण के चुनाव में ही निकल गई. रविवार को जिले के पतरघट व सलखुआ प्रखंड के कुल 22 पंचायतों में संपन्न हुए चुनाव में किसी भी बूथ पर सुरक्षा व्यवस्था का पुख्ता इंतजाम नहीं था. लिहाजा दबंगों की खूब चली और वहां तैनात किए गए बिहार पुलिस व होमगार्ड के जवान मूकदर्शक बने रहे. कई बूथों पर वोगस वोटिंग तो कहीं बूथ कैप्चरिंग की शिकायतें आती रही. जिला प्रशासन द्वारा पंचायत चुनाव में पर्याप्त सुरक्षा व मतदान केंद्रों पर वोटिंग में खलल डालने वाले लोगों पर कार्रवाई की बात भी हवा-हवाई ही साबित हुई.
तटबंध के अंदर व दियारा में 28 को
मतदान केंद्रों पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं रहने के कारण सलखुआ प्रखंड के सिटुआहा व पतरघट प्रखंड के गोलमा पंचायत में अपराधियों ने घंटो गोलीबारी की. गोलमा में अपराधी मतपेटी लेकर फरार हो गया तो ओपीध्यक्ष सहित सुरक्षा कर्मियों को भी असामाजिक तत्वों का शिकार होना पड़ा. बेखौंफ लोगों ने ओपीध्यक्ष की गाड़ी को क्षतिग्रस्त कर उन्हें घायल कर दिया. इस तरह पहले चरण के चुनाव ने शेष आठ चरणों के चुनाव को और भी गंभीर बना दिया है. दूसरे चरण में 28 अप्रैल को सिमरी बख्तियारपुर प्रखंड क्षेत्र के 22, महिषी के 14 एवं नवहट्टा के 15 पंचायतों में मतदान होना है. इन तीनों प्रखंडों के अधिकतर पंचायत पूर्वी व पश्चिमी तटबंध के बीच एवं दियारा क्षेत्रों में स्थित है. वहां शांतिपूर्ण व निष्पक्ष चुनाव कराना प्रशासन की सबसे बड़ी चुनौती होगी. पहले चरण के चुनाव ने यहां के वोटरों में दहशत फैला दिया है.
बीएमपी व सैप के जिम्मे हो बूथ
बिहार पुलिस व होमगार्ड के सहारे यदि इस क्षेत्र में चुनाव कराया गया तो प्रशासन की तो भद्द पिटेगी ही, जानमाल को भी क्षति पहुंचने की संभावना बन सकती है. तटबंध क्षेत्र के अंदर के अपराधिक इतिहास व स्थानीय चुनाव को लेकर लोगों की रंजिश को नजर अंदाज करना प्रशासन की भूल साबित होगी. बाकी बचे आठ चरण के चुनाव के समय रहते ही जिला प्रशासन को इन क्षेत्रों में चुनाव को सफलता पूर्वक संपन्न कराने के लिए अभी से ही ठोस रणनीति को अख्तियार करना पड़ेगा. इन क्षेत्रों के बूथों की सुरक्षा कमान बीएमपी व सेप को देने से सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं.
वोटरों की सुविधा का भी हो ख्याल
आसमान से उगल रहे आग के गोले व गर्मी की तपिश को देखते हुए मतदान के दिन मतदान केन्द्रों पर मतदाताओं की सुविधा का भी ख्याल रखना जरूरी है. पहले चरण के पंचायत चुनाव के दौरान जिला प्रशासन द्वारा बूथों पर वोटरों की सुविधा का घोर अभाव दिखा. पछिया हवा व चिलचलाती धूप में कतार में खड़े हो वोटर अपनी बारी का घंटों इंतजार करते रहे. एक-दो बूथों को छोड़ ज्यादातर मतदान केन्द्रों पर धूप से बचाव को लेकर अस्थायी शेड की कोई व्यवस्था नहीं थी.
मतदान केन्द्रों पर पेयजल की व्यवस्था भी नदारद थी. आगे बांकी आठ चरणों के चुनाव में बढ़ती गर्मी व तपिश को देखते मतदाताओं की सुविधा का ख्याल रखना होगा, नही तो इसका असर मतदान प्रतिशत पर भी पड़ सकता हैं.

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