फेसबुक व वीडियो गेम बच्चों से छीन रहा है बचपन शशि सरोजनी रंगमंच सेवा संस्थान में प्रगतिशील लेखक संघ ने किया परिसंवादसाहित्य अकादमी के विशेष कार्याधिकारी डॉ देवेंद्र कुमार देवेश ने कहाप्रतिनिधि, सहरसा मुख्यालयबाल साहित्य व बाल पत्रिकाओं के अभाव में बच्चों से उनका बचपन छीना जा रहा है. उनके बौद्धिक विकास में अवरोधक बन रहा है. फेसबुक व वीडियो गेम की तरफ बच्चों का आकर्षण उनके भविष्य के लिए बढ़िया नहीं कहा जा सकता. बचपन शब्द उन्मुक्तताओं का पर्याय कहा गया है. जहां उनकी आजादी उनके मनमुताबिक होती है. वे सनी हुई कच्ची मिट्टी के समान होते हैं. जिन्हें जैसी चाहें आकृति दी जा सके. यह बातें स्थानीय पंचवटी स्थित शशि सरोजनी रंगमंच सेवा संस्थान में पहुंचे साहित्य अकादमी, दिल्ली के विशेष कार्याधिकारी डॉ देवेंद्र कुमार देवेश ने कही. प्रगतिशील लेखक संघ द्वारा आयोजित परिसंवाद को संबोधित करते डॉ देवेश ने कहा कि वर्तमान समय में अभिभावकों को बच्चों की गतिविधियों पर ध्यान देने की आवश्यकता बढ़ गई है. रंगमंच सेवा संस्थान के सचिव वंदन कुमार वर्मा के संचालन में चले परिसंवाद में कवि अरविंद श्रीवास्तव ने कहा कि कि बचचों का प्रथम पाठशाला उसका घर होता है. माता-पिता उसके पहले गुरू होते हैं. हमें उनके बेहतर भविष्य निर्माण के लिए सदैव सजग रहना चाहिए. शायर डॉ एहसान शाम ने शशि सरोजनी रंगमंच द्वारा किये जा रहे कार्यों की सराहना करते कहा कि समाज निर्माण के क्षेत्र में वाद-विवाद, विद्वजनों व ऊंचाई पर पहुंचे व्यक्ति से साक्षात्कार, उनके संदेश प्रेरक होते हैं. परिसंवाद में कुंदन कुमार वर्मा, मानोवेंद्रो दास, रूबी यादव, रीना देवी, कौशल यादव, अंजना कुमारी, प्रिया रानी, पूजा देवी, मंजू दिव्यांश, आयुष राठौर, जयशंकर व अन्य मौजूद थे. फोटो- बाल 2- परिसंवाद में डॉ देवेंद्र कुमार देवेश सहित अन्य प्रबुद्ध
फेसबुक व वीडियो गेम बच्चों से छीन रहा है बचपन
फेसबुक व वीडियो गेम बच्चों से छीन रहा है बचपन शशि सरोजनी रंगमंच सेवा संस्थान में प्रगतिशील लेखक संघ ने किया परिसंवादसाहित्य अकादमी के विशेष कार्याधिकारी डॉ देवेंद्र कुमार देवेश ने कहाप्रतिनिधि, सहरसा मुख्यालयबाल साहित्य व बाल पत्रिकाओं के अभाव में बच्चों से उनका बचपन छीना जा रहा है. उनके बौद्धिक विकास में अवरोधक बन […]
