सहरसा मुख्यालय : 11 वर्ष पूर्व भटक कर पाकिस्तान गयी और भारत सरकार के प्रयास से भारत लौटी गीता का डीएनए उसके पिता होने का दावा करनेवाले जिले के कबीराधाप निवासी जनार्दन महतो के डीएनए से नहीं मिला. हालांकि, भारत वापसी के दिन 26 अक्तूबर को ही गीता ने जनार्दन महतो से मिलने के बाद उन्हें पहचानने से इनकार कर दिया था. उसके बावजूद सरकार ने दावेदार जनार्दन को दिल्ली स्थित बिहार निवास में रोके रखा. उसका डीएनए टेस्ट कराया गया.
हालांकि, इस संबंध में उसे कोई प्रमाणपत्र नहीं दिया गया है, लेकिन विदेश मंत्रालय ने उसे मौखिक रूप से यह बता दिया है. दिल्ली में रह रहे जनार्दन के संबंधी राजकुमार के अनुसार तीन दिन पूर्व विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने जनार्दन महतो से कहा कि रिपोर्ट तो आ गयी है, लेकिन मंत्री महोदया का आदेश नहीं हुआ है. आदेश करेंगी, तो दे दिया जायेगा.
उसके बाद वह अपनी पत्नी शांति देवी के साथ अपने बड़े बेटे विनोद के पास पैसेंजर ट्रेन से लुधियाना चला गया. इधर, सहरसा से गये जनार्दन के छोटे पुत्र बलराम महतो, ग्रामीण सुरेश कुमार व कत्थेश्वर महतो भी गुरुवार को ट्रेन पकड़ घर लौट आये हैं.
फोटो देख जनार्दन को ही बताया था पिता
बता दें कि जनार्दन ने विदेश मंत्रालय में अपना फोटो जमा कराया. वहां से पाकिस्तान भेजे गये फोटो को ही गीता ने अपने परिवार के रूप में पहचाना था. इसके बाद विदेश मंत्रालय के निर्देश पर जनार्दन महतो को डीएम द्वारा प्रतिनियुक्त मजिस्ट्रेट व पुलिस पदाधिकारी के साथ विशेष वाहन से पटना और फिर विमान से दिल्ली ले जाया गया था.
26 अक्तूबर को दिल्ली स्थित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर गीता के स्वागत में उसके परिवार के लोग भी गये, जहां अधिकारियों, सुरक्षा बलों व मीडिया से घिरे रहने के कारण मुलाकात नहीं हो सकी. इसके बाद जवाहर लाल नेहरू भवन में जनार्दन की मुलाकात गीता से करायी गयी, जहां गीता ने जनार्दन को पहचानने से इनकार कर दिया था.
