दादियों की मौत हो जाने से घर सहित आसपास शोक छाया हुआ है. पंचगछिया स्टेशन से सटे पद्मपुर गांव में अत्यंत गरीब व अपनी पतोहू के साथ रहने वाली कुमिया देवी (72) चौकी पर सोयी हुई थी. भूकंप के झटके से वह नीचे गिर गयी और मौके पर ही उसकी मौत हो गयी. दिल्ली में ठेला चलाने वाले एकमात्र पोते मुकेश चौधरी के आने के इंतजार में लाश पड़ी है.
दूसरी घटना बिहरा बाजार के दुर्गा स्थान के समीप की है. यहां भूकंप आने के बाद लोग जान बचाने के लिए भागे. हरिश्चंद्र साह की मां खगिया देवी (75) को भीड़ में उसकी पोती नजर नहीं आयी. वह उसे ढ़ूंढ़ने वापस घर आयी और भय से वहीं गिर कर बेहोश हो गयी. घर वाले उसे पीएचसी ले गये, जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया. इसी तरह बेला गांव में अशर्फी मंडल की पत्नी मसोमात मंगनी देवी (78) कुरसी पर बैठी हुई थी. भूकंप के झटके से वह नीचे गिर गयी और उसकी मौत हो गयी.
