आठ बज कर दो मिनट पर शुरू हुआ तूफान का कहर 23 मिनटों तक कोहराम मचाता रहा. तूफान ने शहर सहित गांवों में लोगों का जनजीवन अस्त- व्यस्त कर दिया. फसलों को कर दिया बरबाद.
सहरसा मुख्यालय :मंगलवार की सुहानी शाम ने पल भर में रौद्र रूप धारण कर जिले भर में खूब तबाही मचायी : अटखेलियों से शुरू हुई हवा देखते ही देखते चक्रवाती तूफान में बदल गयी. आठ बज कर दो मिनट पर शुरू हुआ तूफान का कहर 23 मिनटों तक कोहराम मचाता रहा. इसी दौरान आसमान से बारिश के रूप में आफत भी बरसती रही.
ओले गिरे. शहर सहित गांवों में लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया. हालांकि तूफानी बारिश में जान-माल की कोई क्षति नहीं हुई, लेकिन तूफान ने कई बड़े पेड़ों को जड़ से उखाड़ दिया. कई दीवारों को गिरा दिया. कई घरों के छप्पर उड़ा डाले तो फूस के कई घरों को चित्त कर डाला. सबसे बड़ी तबाही खेतों में मची. जहां पिछले तीन बार की बेमौसम बारिश से बची-खुची फसल खेतों में बरबाद हो गयी. गेहूं के बाद मक्के के किसान भी कंगाल हो गये. रबी और खरीफ सभी फसलों को क्षति पहुंची.
देर रात से ही अस्पताल आने लगे पीड़ित
तूफान के बाद विभिन्न घटनाओं में जख्मी होकर लोगों के सदर अस्पताल आने का सिलसिला देर रात से ही जारी रहा. एक बज कर 20 मिनट पर मधेपुरा जिले के मंजोरा गांव से जख्मी व रेफर होकर पहुंची मकिना खातून यहां डॉक्टर से दिउखा बिना रेफर कराए ही निजी क्लिनीक चली गयी.
शहरी क्षेत्र के रूपनगरा की 35 वर्षीय बीबी गुलशन खातून भी रात में ही सदर अस्पताल में भरती हुई. इसके कमर पर घर का टिन गिरा. जिससे कमर के नीचे क ा मांस कट कर लटक गया. इसी तरह बरियाही से बदहवास दंपति पहुंचे वार्ड नंबर सात बीचला टोला के पति क ी पीठ पर घर की दीवार गिर गयी. कमर, पीठ, सिर, चेहरे में जबरदस्त चोट आयी है. वहीं उसकी पत्नी सकुल देवी का सिर फट गया. वह लगातार बेहोश है. इसी तरह पेड़ की डाली टूट कर गिरने से आजाद चौक की सीता देवी का हाथ टूट गया.
हालांकि इसके अलावे भी कुछ अन्य जख्मी होकर अस्पताल पहुंचे. जो प्राथमिक उपचार के बाद लौट गये. गेहूं, मकई, मूंग, आम, लीची व सब्जी
चैत-वैशाख के महीने में रह-रह कर हो रही आंधी व बारिश से खेतीबाड़ी पर आफत आ गई है. पहले गेहूं की फसल बरबाद हुई. फिर मूंग के पौधे गल गये.
तेज हवा, आंधी व तूफान में मक्के के पौधे भी टूट कर गिर गए. मंगलवार के तूफान में जिले के कई खेतों में लगे केले के पौधे भी सो पड़े. वहीं इस बार लोगों को आम व लीची जैसे फलों से महरूम ही रहना होगा. आंधी-तूफान में दोनों फलों के टिकोले झड़ गये. इसी तरह खेतों में लगी सब्जियों को जमकर नुकसान पहुंचा. झींगा, झि ंगली, भिंडी, खीरा, कद्दू, परवल, हरी मिर्च सब बरबाद हो गये.
मैं तो अंदर तक सहम गया था..
जब आसमान में बिजली चमकी और गरजने लगे बादल
रोशनी के लिए मोमबत्ती जला ही रहा था कि इतने में ही हवा की तेज रफ्तार ने उसे बुझा दिया. हवा आंधी का रूप अख्तियार कर चुकी थी. एकाएक पानी की बौछार होने लगी.
सहरसा : करीब आठ बजे होंगे. मैं खाना खा रहा था. आसमान में बिजली की चमक दिखी और इधर घर की बिजली गुम हो गयी. फिर बादल गरजने की आवाज सुनायी दी. रोशनी के लिए मोमबत्ती जला ही रहा था कि इतने में ही हवा की तेज रफ्तार ने उसे बुझा दिया. हवा आंधी का रूप अख्तियार कर चुकी थी.
एकाएक पानी की बौछार होने लगी. चमक रही बिजली के सहारे बाहर पेड़ों पर नजर पड़ी तो हवा का वेग तकरीबन सौ किमी के रफ्तार का आंका. ऐसा लग रहा था कि पेड़ के उपर का हिस्सा अब टूट कर मेरे आंगन में गिरने ही वाला है. तक तक आंगन में लगातार गिर रहे बड़े-बड़े ओले पर नजर पड़ी.
हवा के झटके में वे ओले भी दूर जाकर गिर रहे थे. इतने में मेरे घर में कहीं से किसी के घर का छप्पर उड़ आ गिरा. फिर चमक रही रोशनी में ही पानी की टंकी का ढ़क्कन फलाइंग डिश की तरह इधर-उधर उड़ता दिखा. मैं तो अंदर तक सहम गया कि क्या प्रलय आने वाला है.
सब आफत एक के बाद एक कर आ रही है. तक तक झटके से मेरे अंदर के कमरे में पानी भर चुका था. करीब आधे घंटे के बाद पहले हवा शांत हुई फिर बारिश रूकी. तब जाकर जी में जी आया. लेकिन बिजली तो बुधवार को 12 बजे दिन के बाद ही आ पायी. खाना खाने के बाद सड़क पर टहल रहा था. बह रही मंद-मंद हवा अच्छी लग रही थी. पहले धीरे-धीरे फिर एकाएक रफ्तार में हवा बहने लगी.
चौक के सारे दुकान आनन-फानन में दुकानें बंद करने लगे. मेरी स्थिति किंकर्तव्यविमूढ़ की हो गई. न तो लौट कर घर जा सकता था और न ही आगे बाजार की ओर ही जा सकता था.
वहीं आसपास दुकान में टिकने की सोंच ही रहा था कि देखा मात्र एक दुकान का शटर थोड़ा उठा हुआ है. बाइक को वहीं स्टैंड कर उसी शटर को थोड़ा और उठा उस दुकान में घुस गया. थोड़ी ही देर में पांच-सात आदमी और वहां इसी तरह घुस आए. सबके सब इसे आफत व महाप्रलय की चेतावनी बता रहे थे.
लेकिन मैं कुछ भी बोल नहीं पा रहा था क्योंकि मेरा ध्यान घर पर बना हुआ था.बाहर गिर रहे ओले की झनझनाहट और बिजली गरजने की आवाज मुङो अंदर तक हिला चुकी थी. आधे घंटे के बाद हवा के शांत होते ही भीगा-भीगा घर भागा तो वहां सबको कुशल पाकर ही मैं अंदर से शांत हो पाया.
