सहरसा : प्रमंडलीय मुख्यालय होने के बावजूद इस शहर में ऐसा कुछ खास नहीं है, जिससे इस शहर के लोगों को यहां के स्थायी निवासी होने पर गर्व हो. शहर की स्थिति दिनोंदिन खराब ही होती जा रही है. इस शहर में न तो ठीक से चलने के लिए सड़क है, न तो बैठने के लिए सुसज्जित कोई पार्क.
न तो गाड़ी खड़ी करने के लिए कोई पार्किंग है और न ही शहर की सुंदरता के लिए चौड़ी सड़क व सड़क के किनारे की साफ सफाई की व्यवस्था. यहां कुछ बचा भी है तो वह है सरकार की खाली जमीन. जिसका इस्तेमाल शहर के सौंदर्य को निखारने में किया जा सकता है.
लेकिन शहर में खाली पड़ी अधिकांश सरकारी जमीन पर कई वर्षों से अतिक्रमण है. अतिक्रमणकारी निजी उपयोग से लेकर व्यावसायिक उपयोग करते आ रहे हैं. जबकि सड़क किनारे की अधिकांश जमीन पर झोपड़ीनुमा घर बना लिया गया है. प्रशासन द्वारा कार्रवाई भी की गयी. लेकिन अतिक्रमणकारी अपनी जगह पर बने हुए हैं.
यही नहीं, अतिक्रमणकारी अब दुकान नहीं, मकान बनाने की तैयारी में जुट गये हैं. लेकिन जिला प्रशासन संज्ञान लेने को कोई तैयार नहीं है. यदि अतिक्रमण हटा दिया जाये, तो शहर के लोगों को चौड़ी सड़क, वाहनों की पार्किंग, फुटपाथ सहित सुलभ शौचालय जैसी सुविधा मिलेगी और शहर का विकास होना संभव हो पायेगा.
