सहरसा जिले के कोसी पूर्वी एवं पश्चिमी तटबंध के भीतर बसे सलखुआ प्रखंड की चानन पंचायत अंतर्गत बसाही गांव (वार्ड नंबर 12) में बीते दिन सुबह उस वक्त भारी अफरातफरी मच गई, जब खेत के ऊपर से गुजर रहा 11 हजार वोल्ट का हाईटेंशन बिजली तार अचानक टूटकर खेत में जा गिरा. गनीमत रही कि जिस समय चालू तार टूटकर गिरा, उस समय खेत में कोई किसान या मजदूर काम नहीं कर रहा था, जिससे एक बड़ा और दर्दनाक हादसा होने से टल गया. घटना के बाद से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है.
खेत में गिरा चालू तार, मची अफरातफरी
तार टूटने के बाद उसमें विद्युत धारा प्रवाहित होने की खबर मिलते ही आसपास के ग्रामीणों में हड़कंप मच गया. स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए जागरूक ग्रामीणों ने तत्काल सक्रियता दिखाई और खेत की ओर जाने वाले रास्ते पर लोगों की आवाजाही को रोक दिया, ताकि कोई अनहोनी न हो सके. ग्रामीणों ने बताया कि जिस स्थान पर तार टूटकर गिरा है, उसके आसपास बड़े पैमाने पर धान की खेती हो रही है. यदि तार गिरने के वक्त कोई भी किसान या मजदूर खेत में मौजूद होता, तो करंट की चपेट में आने से जानमाल का भारी नुकसान हो सकता था.
लंबे समय से जर्जर थे तार, शिकायत के बाद भी उदासीन रहा विभाग
ग्रामीणों के अनुसार, यह हाईटेंशन लाइन लंबे समय से जर्जर और अत्यधिक ढीली होकर नीचे लटक रही थी. खेतों के ऊपर काफी नीचे झूल रहे तारों के कारण वहां काम करने वाले किसानों और मजदूरों के सिर पर हर वक्त मौत का साया मंडराता रहता था. ग्रामीणों का आरोप है कि इस जर्जर और लटके हुए तार की जानकारी पहले भी कई बार बिजली विभाग के स्थानीय कर्मियों और अधिकारियों को दी गई थी. इसके बावजूद विभाग की ओर से समय रहते तारों को कसने या बदलने की कोई पहल नहीं की गई.
विभाग के खिलाफ आक्रोश, सर्वे कराकर मरम्मत कराने की मांग
हाईटेंशन तार गिरने की इस गंभीर लापरवाही से आक्रोशित ग्रामीणों ने बिजली विभाग के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. किसानों और स्थानीय लोगों ने बिजली विभाग से अविलंब घटनास्थल का मुआयना कर तार को सुरक्षित रूप से दुरुस्त कराने की मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि पूरे तटबंधीय क्षेत्र में कई जगहों पर बिजली के तार जर्जर होकर जमीन के करीब लटक रहे हैं. उन्होंने मांग की कि विभाग सभी खतरनाक स्थानों का तत्काल तकनीकी सर्वे कराए, जर्जर तारों को बदले और खेतों के ऊपर से गुजर रही सभी हाईटेंशन लाइनों को मानक सुरक्षित ऊंचाई पर करे, ताकि भविष्य में किसानों की जान जोखिम में न पड़े.
