ग्रामीणों ने किया हंगामा, नारेबाजी व एकपक्षीय कार्रवाई का लगाया आरोप
परिजनों की बेरहमी से पिटाई व घर में घुस कर लूटपाट किये जाने का आरोप
पतरघट : लोक शिकायत निवारण प्राधिकार सह जिला पदाधिकारी के निर्देश पर जम्हरा पंचायत के अंतर्गत नया टोला बस्ती में मंगलवार को अंचल अधिकारी ने सिकंदर महतो के तीन आवासीय घरों को तोड़ अतिक्रमण मुक्त कराया. भारी संख्या में पुरुष-महिला पुलिस व जेसीबी मशीन के साथ अचानक पहुंच कर पंजाब में मजदूरी कर रहे सिकंदर महतो का घर तोड़ा गया.
वहीं स्थानीय ग्रामीणों व परिजनों ने सीओ सहित पस्तपार शिविर प्रभारी जितेंद्र चौधरी, पतरघट पुलिस के सहायक अवर निरीक्षक हरिशंकर चौधरी पर एक पक्षीय कार्रवाई का आरोप लगाया. परिजनों की बेरहमी से पिटाई, घर में घुस कर लूटपाट किये जाने का आरोप लगाते हुए प्रशासन के खिलाफ जम कर नारेबाजी की. आक्रोशित ग्रामीणों ने बताया कि बिहार सरकार की जमीन में लगभग 50 वर्षों से प्रथम पक्ष के सिकंदर महतो व दूसरे पक्ष के संजय साह सहित तीस भूमिहीन परिवार अपना घर बनाकर रहते आ रहे हैं. उनलोगों ने बताया कि जब प्रशासन सरकारी जमीन से कब्जा हटाने आयी तो सभी भूमिहीन परिवारों को उजाड़ कर फेंक देना चाहिए था. सिर्फ सिकंदर महतो का ईंट व चदरा से बने तीन घर को जेसीबी मशीन से तोड़ दिया. परिजनों की सीओ व पुलिस कर्मियों ने पिटाई की.
घर में रखे सारे सामान को फेंक कर लूटपाट कर लिया गया. जो कहीं से भी न्यायोचित नहीं है. घर को अचानक तोड़े जाने से वयोवृद्ध मां सहित बच्चे सीओ व पुलिस पदाधिकारी के पैर पकड़ कर रोते रहे. रात में आयी बारिश व आंधी में पीड़ित परिजनों को प्लास्टिक के सहारे रात गुजारनी पड़ी. ग्रामीणों व परिजनों ने प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि अतिक्रमण हटाने के दौरान स्वयं सीओ व पस्तपार प्रभारी ने पुलिस बल के सहयोग से मणि देवी, साजन कुमारी, अजित कुमार, जीरा देवी, गुड़िया देवी को पीटा व तब तक पुलिस अभिरक्षा में रखा जब तक पूरे मकान को जमींदोज नहीं कर दिया गया. स्थानीय लोगों व परिजनों ने घटना की जानकारी स्थानीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव व स्थानीय विधायक रत्नेश सादा को देते हुए सरकार एवं प्रशासन से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर कार्रवाई किये जाने की मांग करते हुए न्याय की गुहार लगायी.
इस बाबत सीओ अनंत कुमार ने बताया कि हम जिला पदाधिकारी के द्वारा दिये गये दिशा निर्देश के आलोक में अतिक्रमणमुक्त कराने गये थे. परिजनों एवं ग्रामीणों द्वारा हम पर लगाये गये सभी आरोप बेबुनियाद एवं तथ्य से परे हैं.
