मुंह पर रुमाल रख कर वार्ड जाना बनी मजबूरी
स्थानीय के साथ बाहर से आने वाले अधिकारियों की भी नहीं जाती है नजर
सहरसा : एक तरफ जहां एम्स की शाखा के लिए शहर की दुकानों के बोर्ड तक को हमें चाहिए एम्स से पाटा जा रहा है. वहीं प्रमंडलीय अस्पताल कहे जाने वाले सदर अस्पताल का संक्रामक वार्ड स्वयं संक्रमण से ग्रसित है. इसे देखने तक की फुर्सत अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों को नहीं है. संक्रामक वार्ड लावारिसों व अावारा पशुओं की शरणस्थली बन गया है. वहीं वार्ड के सामने मलमूत्र से उठने वाली दुर्गंध लोगों को बीमार करने के लिए काफी है. साफ सफाई भगवान भरोसे है. लोगों को मुंह पर रूमाल रख कर जाना मजबूरी है. इससे मरीजों की हालात का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है. वार्ड में लगे बेड अंग्रेज जमाने की याद दिला रहे हैं.
वरीय अधिकारियों की भी नजर इस ओर नहीं जा रही है. मालूम हो कि जिला से लेकर बाहर से आने वाले अधिकारी भी आपातकालीन वार्ड एवं कुछ अन्य वार्डो का निरीक्षण कर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर लेते हैं. स्थानीय अधिकारी भी उन्हें इस वार्ड की तरफ ले जाना नहीं चाहते हैं, ताकि व्यवस्था की पोल न खुल जाये. वहीं निरीक्षण के लिए आये अधिकारियों की नजर वार्ड पर थोड़ी दूरी पर रहने के कारण नहीं जा पाती है. हालांकि टेटनस रोग के मरीज सामने नहीं आये हैं.
